
(ब्यूरो अमरनाथ/ बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़ लखीमपुर-खीरी)
पलियाकलां, खीरी। तहसील परिसर में शुक्रवार को कथित भ्रष्टाचार और मनमानी के विरोध में अधिवक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने तहसील के लेखपालों पर रिश्वतखोरी, लापरवाही और मनमाने तरीके से कार्य करने के गंभीर आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने तहसील के मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन बाधित रहा।
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का आरोप था कि राजस्व संबंधी कार्यों के लिए किसानों और आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अधिवक्ताओं ने नामांतरण, विरासत, पैमाइश, रिपोर्ट सहित अन्य राजस्व कार्यों में अनावश्यक देरी किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कई मामले लंबे समय से लंबित हैं, जिससे ग्रामीणों और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि एसडीएम और तहसीलदार के निर्देशों के बावजूद कुछ लेखपालों द्वारा कार्यों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि अधिकारियों के निर्देशों का भी पालन नहीं होगा तो तहसील की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
मुख्य मार्ग पर जाम लगने के कारण वाहनों की कतारें लग गईं और तहसील आने वाले वादकारियों एवं आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं से वार्ता कर स्थिति सामान्य कराने का प्रयास किया।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत विरोध के लिए नहीं, बल्कि राजस्व कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्ध निस्तारण और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने मांग की कि लेखपालों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
हालांकि, लगाए गए रिश्वतखोरी के आरोपों पर संबंधित लेखपालों अथवा तहसील प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आ सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
तहसील गेट पर अधिवक्ताओं का उग्र प्रदर्शन, लेखपालों पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप एसडीएम व तहसीलदार के निर्देशों के बावजूद कार्य न होने का आरोप, मुख्य मार्ग जाम कर जताया आक्रोश
तहसील गेट पर अधिवक्ताओं का उग्र प्रदर्शन, लेखपालों पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप एसडीएम व तहसीलदार के निर्देशों के बावजूद कार्य न होने का आरोप, मुख्य मार्ग जाम कर जताया आक्रोश

(ब्यूरो अमरनाथ/ बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़ लखीमपुर-खीरी)
पलियाकलां, खीरी। तहसील परिसर में शुक्रवार को कथित भ्रष्टाचार और मनमानी के विरोध में अधिवक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने तहसील के लेखपालों पर रिश्वतखोरी, लापरवाही और मनमाने तरीके से कार्य करने के गंभीर आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने तहसील के मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन बाधित रहा।
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का आरोप था कि राजस्व संबंधी कार्यों के लिए किसानों और आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अधिवक्ताओं ने नामांतरण, विरासत, पैमाइश, रिपोर्ट सहित अन्य राजस्व कार्यों में अनावश्यक देरी किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कई मामले लंबे समय से लंबित हैं, जिससे ग्रामीणों और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि एसडीएम और तहसीलदार के निर्देशों के बावजूद कुछ लेखपालों द्वारा कार्यों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि अधिकारियों के निर्देशों का भी पालन नहीं होगा तो तहसील की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
मुख्य मार्ग पर जाम लगने के कारण वाहनों की कतारें लग गईं और तहसील आने वाले वादकारियों एवं आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं से वार्ता कर स्थिति सामान्य कराने का प्रयास किया।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत विरोध के लिए नहीं, बल्कि राजस्व कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्ध निस्तारण और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने मांग की कि लेखपालों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
हालांकि, लगाए गए रिश्वतखोरी के आरोपों पर संबंधित लेखपालों अथवा तहसील प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आ सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।






