Saturday, June 20, 2026

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*”मक्का खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, विकास प्रदर्शनी में आयोजित हुई कृषक गोष्ठी”* /संवाददाता देवानंद पांडेय

संत कबीर नगर। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर समेकित जनकल्याण एवं जन- जागरूकता अभियान के क्रम में विकास भवन स्थित डीपीआरसी हाॅल/परिसर में आयोजित जनकल्याणकारी शिविर एवं विकास प्रदर्शनी के दूसरे दिन आज मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में कृषि विभाग द्वारा त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम योजना अंतर्गत जनपद स्तरीय मक्का विकास कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना, पशुपालन, उद्यान विभाग, इफ्को, कृषि विभाग, कृषक उत्पादक संघ, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, के स्टाल लगाए गए थे। इस कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विकास खंडों के लगभग तीन सौ कृषकों, महिला कृषकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का आरम्भ मुख्य विकास अधिकारी द्वारा दीप प्रज्वलित कर के किया गया।
कार्यक्रम‌ में डॉक्टर देवेश कुमार वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र बगही ने आधुनिक तरीके से खेती पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज जमीन का स्वास्थ्य बुरी तरह से खराब हो चुका है इसको ठीक करने का उपाय करना पड़ेगा। हमें अपना स्वास्थ्य ठीक करने के साथ मिट्टी की जांच एवं जैविक खेती के साथ हरी खाद का भी प्रयोग करना पड़ेगा, इस प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। चूंकि रासायनिक खादों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य खराब है अतः बुवाई के पहले हरी खाद की बुवाई अवश्य करें। उन्होंने कहा कि धान की खेती के पहले ग्रीष्म कालीन जुताई अवश्य करनी चाहिए और उन्होंने दलहन और तिलहन लगाने पर भी जोर दिया और यह अवगत कराया की फसल चक्र अपनाने से ज्यादा लाभ होता है।
इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर दुर्गेश कुमार ने मक्का की खेती के तकनीकी विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मक्के की खेती करके किसान धान और गेहूं से ज्यादा लाभ कमा सकते हैं।उन्होंने मक्के की खेती में कीड़ों के प्रकोप से बचने का उपाय बताया एवं ज्यादा उत्पादन प्राप्त करने का तरीका बताया। यशवर्धन पांडेय ग्राम तरयापार विकास खंड नाथनगर द्वारा मक्का की खेती के बारे में विस्तार से बताते हुए अवगत कराया गया कि जनपद के नाथनगर के गायघाट के क्षेत्र में किसान केवल आलू की बुवाई करता था लेकिन मक्के की खेती के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाने के बाद आज उस क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में किसान मक्के की खेती कर रहे हैं। विभाग द्वारा बैच ड्रायर प्राप्त कर लिया गया है जिससे मक्के के दाने में नमी की समस्या दूर हो गई है। यहां से प्राप्त मक्का इथेनॉल बनाने के लिए आईजीएल कंपनी को दिया जाता है जिससे किसानों को मुनाफा प्राप्त होता है। आज एक एकड़ में लगभग 35 से 40 कुंतल की पैदावार नाथनगर का किसान मक्के की खेती से प्राप्त कर रहा है। विकासखंड सेमारियावां के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र राय ने धान की सीधी खेती पर प्रकाश डाला और उन्होंने कहा कि किसानों को मक्का की खेती अवश्य करनी चाहिए। मक्का की खेती करने के बाद उसकी अवशेषों से मोथ के पौधे नष्ट होती है जिसे आने वाले समय में किसान को पैसे की बचत प्राप्त होती है। जिला कृषि अधिकारी ने उपस्थित किसानों को जनपद में बीज की उपलब्धता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि सामान्य मिनी किट एवं प्रदर्शन हेतु बीज उपलब्ध है जिन्हें बुकिंग करा कर किसान प्राप्त कर सकता है साथ ही किसानों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि धान, ढैंचा, दलहन, तिलहन के साथ अरहर, तिल, उड़द और श्री अन्न के बीज भी उपलब्ध है, किसान इन्हें आनलाइन बुक करके प्राप्त कर अपनी खेती के कार्य को कर सकता है। आज किसानों को घर बैठे हर सुविधा प्राप्त हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि जनपद में किसी भी तरह के उर्वरक की कमी नहीं है और किसी भी अफवाह में पड़ने की अपेक्षा किसान अपने खेतों की आवश्यकता के अनुसार उर्वरक प्राप्त करें। यह भी अवगत कराया गया की , कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसान को उर्वरक का लाभ नहीं मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में उप कृषि निदेशक द्वारा कार्यक्रम के समाप्ति की घोषणा की गई एवं आए हुए समस्त कृषकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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*”मक्का खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, विकास प्रदर्शनी में आयोजित हुई कृषक गोष्ठी”* /संवाददाता देवानंद पांडेय

संत कबीर नगर। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर समेकित जनकल्याण एवं जन- जागरूकता अभियान के क्रम में विकास भवन स्थित डीपीआरसी हाॅल/परिसर में आयोजित जनकल्याणकारी शिविर एवं विकास प्रदर्शनी के दूसरे दिन आज मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में कृषि विभाग द्वारा त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम योजना अंतर्गत जनपद स्तरीय मक्का विकास कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना, पशुपालन, उद्यान विभाग, इफ्को, कृषि विभाग, कृषक उत्पादक संघ, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, के स्टाल लगाए गए थे। इस कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विकास खंडों के लगभग तीन सौ कृषकों, महिला कृषकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का आरम्भ मुख्य विकास अधिकारी द्वारा दीप प्रज्वलित कर के किया गया।
कार्यक्रम‌ में डॉक्टर देवेश कुमार वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र बगही ने आधुनिक तरीके से खेती पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज जमीन का स्वास्थ्य बुरी तरह से खराब हो चुका है इसको ठीक करने का उपाय करना पड़ेगा। हमें अपना स्वास्थ्य ठीक करने के साथ मिट्टी की जांच एवं जैविक खेती के साथ हरी खाद का भी प्रयोग करना पड़ेगा, इस प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। चूंकि रासायनिक खादों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य खराब है अतः बुवाई के पहले हरी खाद की बुवाई अवश्य करें। उन्होंने कहा कि धान की खेती के पहले ग्रीष्म कालीन जुताई अवश्य करनी चाहिए और उन्होंने दलहन और तिलहन लगाने पर भी जोर दिया और यह अवगत कराया की फसल चक्र अपनाने से ज्यादा लाभ होता है।
इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर दुर्गेश कुमार ने मक्का की खेती के तकनीकी विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मक्के की खेती करके किसान धान और गेहूं से ज्यादा लाभ कमा सकते हैं।उन्होंने मक्के की खेती में कीड़ों के प्रकोप से बचने का उपाय बताया एवं ज्यादा उत्पादन प्राप्त करने का तरीका बताया। यशवर्धन पांडेय ग्राम तरयापार विकास खंड नाथनगर द्वारा मक्का की खेती के बारे में विस्तार से बताते हुए अवगत कराया गया कि जनपद के नाथनगर के गायघाट के क्षेत्र में किसान केवल आलू की बुवाई करता था लेकिन मक्के की खेती के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाने के बाद आज उस क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में किसान मक्के की खेती कर रहे हैं। विभाग द्वारा बैच ड्रायर प्राप्त कर लिया गया है जिससे मक्के के दाने में नमी की समस्या दूर हो गई है। यहां से प्राप्त मक्का इथेनॉल बनाने के लिए आईजीएल कंपनी को दिया जाता है जिससे किसानों को मुनाफा प्राप्त होता है। आज एक एकड़ में लगभग 35 से 40 कुंतल की पैदावार नाथनगर का किसान मक्के की खेती से प्राप्त कर रहा है। विकासखंड सेमारियावां के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र राय ने धान की सीधी खेती पर प्रकाश डाला और उन्होंने कहा कि किसानों को मक्का की खेती अवश्य करनी चाहिए। मक्का की खेती करने के बाद उसकी अवशेषों से मोथ के पौधे नष्ट होती है जिसे आने वाले समय में किसान को पैसे की बचत प्राप्त होती है। जिला कृषि अधिकारी ने उपस्थित किसानों को जनपद में बीज की उपलब्धता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि सामान्य मिनी किट एवं प्रदर्शन हेतु बीज उपलब्ध है जिन्हें बुकिंग करा कर किसान प्राप्त कर सकता है साथ ही किसानों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि धान, ढैंचा, दलहन, तिलहन के साथ अरहर, तिल, उड़द और श्री अन्न के बीज भी उपलब्ध है, किसान इन्हें आनलाइन बुक करके प्राप्त कर अपनी खेती के कार्य को कर सकता है। आज किसानों को घर बैठे हर सुविधा प्राप्त हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि जनपद में किसी भी तरह के उर्वरक की कमी नहीं है और किसी भी अफवाह में पड़ने की अपेक्षा किसान अपने खेतों की आवश्यकता के अनुसार उर्वरक प्राप्त करें। यह भी अवगत कराया गया की , कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसान को उर्वरक का लाभ नहीं मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में उप कृषि निदेशक द्वारा कार्यक्रम के समाप्ति की घोषणा की गई एवं आए हुए समस्त कृषकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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