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(ब्यूरो/बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़)
लखीमपुर-खीरी। मझगई वन रेंज के बबौरा बीट अंतर्गत ग्राम रामपुर मजरा रामनगरकला, थाना भीरा क्षेत्र में आबादी वाले इलाके में पहुंची बाघिन को वन विभाग ने सोमवार सुबह विशेष अभियान चलाकर ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया था। रेस्क्यू के बाद बाघिन को पिंजरे के माध्यम से मझगई रेंज परिसर लाया गया, जहां पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।
वन विभाग के अनुसार 23 जून की सुबह करीब 5:10 बजे बाघिन को सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किया गया था। प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण में उसकी स्थिति सामान्य बताई गई और उसे पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी की जा रही थी।
हालांकि, शाम करीब 6:30 बजे रेस्क्यू की गई बाघिन की अचानक मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग में हलचल मच गई और मौत के कारणों को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यही बाघिन पिछले दिनों क्षेत्र में हुई दो मौतों की घटनाओं के बाद विभाग की निगरानी में थी। आबादी क्षेत्र में उसकी लगातार मौजूदगी को देखते हुए उसे पकड़ने का अभियान चलाया गया था।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बाघिन की मौत ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान लगाए गए डार्ट या दवा के प्रभाव से हुई या कोई अन्य कारण रहा। वन विभाग ने कहा है कि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
बाघिन के शव का पोस्टमार्टम भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली के विशेषज्ञों द्वारा कराया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रेस्क्यू के 13 घंटे बाद बाघिन की मौत, क्या ट्रेंकुलाइजेशन बना वजह? जांच शुरू
रेस्क्यू के 13 घंटे बाद बाघिन की मौत, क्या ट्रेंकुलाइजेशन बना वजह? जांच शुरू
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(ब्यूरो/बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़)
लखीमपुर-खीरी। मझगई वन रेंज के बबौरा बीट अंतर्गत ग्राम रामपुर मजरा रामनगरकला, थाना भीरा क्षेत्र में आबादी वाले इलाके में पहुंची बाघिन को वन विभाग ने सोमवार सुबह विशेष अभियान चलाकर ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया था। रेस्क्यू के बाद बाघिन को पिंजरे के माध्यम से मझगई रेंज परिसर लाया गया, जहां पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।
वन विभाग के अनुसार 23 जून की सुबह करीब 5:10 बजे बाघिन को सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किया गया था। प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण में उसकी स्थिति सामान्य बताई गई और उसे पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी की जा रही थी।
हालांकि, शाम करीब 6:30 बजे रेस्क्यू की गई बाघिन की अचानक मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग में हलचल मच गई और मौत के कारणों को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यही बाघिन पिछले दिनों क्षेत्र में हुई दो मौतों की घटनाओं के बाद विभाग की निगरानी में थी। आबादी क्षेत्र में उसकी लगातार मौजूदगी को देखते हुए उसे पकड़ने का अभियान चलाया गया था।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बाघिन की मौत ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान लगाए गए डार्ट या दवा के प्रभाव से हुई या कोई अन्य कारण रहा। वन विभाग ने कहा है कि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
बाघिन के शव का पोस्टमार्टम भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली के विशेषज्ञों द्वारा कराया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।






