Friday, August 21, 2026

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बारिश में स्कूली बच्चों को बस ने नहीं दिया सहारा, संपूर्णानगर में छात्र-छात्राओं की बढ़ी परेशानी

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(ब्यूरो अमरनाथ/बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़ खीरी)

संपूर्णानगर, खीरी। 18 अगस्त दिन मंगलवार सुबह 7:10 पर खजुरिया से पलिया जा रही एक बस को संपूर्णानगर वन विभाग कार्यालय के सामने स्कूल जाने वाले छात्रों ने तेज बारिश के बीच हाथ देकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि बस चालक ने बस नहीं रोकी। मजबूर होकर छात्रों को बारिश में भीगते हुए संपूर्णानगर तिराहे तक जाना पड़ा।

बताया जा रहा है कि छात्रों को राजकीय इंटर कॉलेज सेमरी बमनगर पढ़ने जाना था। सामान्य दिनों में स्कूली बच्चे तिराहे तक पहुंचकर बस पकड़ लेते हैं, लेकिन तेज बारिश के कारण उन्होंने वन विभाग कार्यालय के सामने ही बस रोकने का प्रयास किया था। आरोप है कि बस चालक ने बच्चों को बैठाने के बजाय बस आगे बढ़ा दी और संपूर्णानगर तिराहे पर जाकर बस रोकी।

बाद में जब बस चालक से बच्चों को न बैठाने के संबंध में सवाल किया गया तो चालक ने कथित तौर पर कहा कि किसी के घर के सामने बस नहीं रोकी जा सकती। जबकि बस में कुछ छात्र और अन्य सवारियां बैठी थीं। चालक के इस कथित रवैये को लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी है।

बारिश के मौसम में स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब बच्चे तेज बारिश में बस रोकने का प्रयास कर रहे हों, तो क्या मानवीय संवेदना के आधार पर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नहीं बनती?

स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन और परिवहन विभाग से मामले का संज्ञान लेकर बस संचालन की जांच कराने तथा स्कूली बच्चों के लिए उचित बस स्टॉप और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

बस पर दिखाई दे रहा पंजीकरण नंबर UP31 AT 2977 बताया जा रहा है।

वहीं, भारी बारिश के बीच जब मौसम विभाग की ओर से भी लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं, ऐसे समय में स्कूली बच्चों को बारिश में छोड़ देने का कथित मामला बस संचालन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।

बारिश में बच्चे हाथ देकर बस रोकते रहे और बस चालक साहब की स्टेयरिंग के साथ-साथ दबंगई भी दौड़ती रही। सवाल यह भी है कि पलिया बस यूनियन और संपूर्णानगर बस मैनेजर द्वारा चालकों को बस चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है या यात्रियों की मजबूरी पर रौब दिखाने की?

अगर बच्चों को तेज बारिश में देखकर भी बस नहीं रुकती, तो फिर ऐसी परिवहन व्यवस्था किसके लिए है—सवारियों के लिए या सिर्फ स्टेयरिंग संभालने वालों के रौब के लिए?

अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में जांच करते हैं या फिर बच्चों की तरह यह शिकायत भी बारिश में भीगकर कहीं बह जाती है।

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बारिश में स्कूली बच्चों को बस ने नहीं दिया सहारा, संपूर्णानगर में छात्र-छात्राओं की बढ़ी परेशानी

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(ब्यूरो अमरनाथ/बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़ खीरी)

संपूर्णानगर, खीरी। 18 अगस्त दिन मंगलवार सुबह 7:10 पर खजुरिया से पलिया जा रही एक बस को संपूर्णानगर वन विभाग कार्यालय के सामने स्कूल जाने वाले छात्रों ने तेज बारिश के बीच हाथ देकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि बस चालक ने बस नहीं रोकी। मजबूर होकर छात्रों को बारिश में भीगते हुए संपूर्णानगर तिराहे तक जाना पड़ा।

बताया जा रहा है कि छात्रों को राजकीय इंटर कॉलेज सेमरी बमनगर पढ़ने जाना था। सामान्य दिनों में स्कूली बच्चे तिराहे तक पहुंचकर बस पकड़ लेते हैं, लेकिन तेज बारिश के कारण उन्होंने वन विभाग कार्यालय के सामने ही बस रोकने का प्रयास किया था। आरोप है कि बस चालक ने बच्चों को बैठाने के बजाय बस आगे बढ़ा दी और संपूर्णानगर तिराहे पर जाकर बस रोकी।

बाद में जब बस चालक से बच्चों को न बैठाने के संबंध में सवाल किया गया तो चालक ने कथित तौर पर कहा कि किसी के घर के सामने बस नहीं रोकी जा सकती। जबकि बस में कुछ छात्र और अन्य सवारियां बैठी थीं। चालक के इस कथित रवैये को लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी है।

बारिश के मौसम में स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब बच्चे तेज बारिश में बस रोकने का प्रयास कर रहे हों, तो क्या मानवीय संवेदना के आधार पर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नहीं बनती?

स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन और परिवहन विभाग से मामले का संज्ञान लेकर बस संचालन की जांच कराने तथा स्कूली बच्चों के लिए उचित बस स्टॉप और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

बस पर दिखाई दे रहा पंजीकरण नंबर UP31 AT 2977 बताया जा रहा है।

वहीं, भारी बारिश के बीच जब मौसम विभाग की ओर से भी लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं, ऐसे समय में स्कूली बच्चों को बारिश में छोड़ देने का कथित मामला बस संचालन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।

बारिश में बच्चे हाथ देकर बस रोकते रहे और बस चालक साहब की स्टेयरिंग के साथ-साथ दबंगई भी दौड़ती रही। सवाल यह भी है कि पलिया बस यूनियन और संपूर्णानगर बस मैनेजर द्वारा चालकों को बस चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है या यात्रियों की मजबूरी पर रौब दिखाने की?

अगर बच्चों को तेज बारिश में देखकर भी बस नहीं रुकती, तो फिर ऐसी परिवहन व्यवस्था किसके लिए है—सवारियों के लिए या सिर्फ स्टेयरिंग संभालने वालों के रौब के लिए?

अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में जांच करते हैं या फिर बच्चों की तरह यह शिकायत भी बारिश में भीगकर कहीं बह जाती है।

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