(ब्यूरो रिपोर्ट / बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़, लखीमपुर खीरी)
पलिया कलां, लखीमपुर खीरी। महंगापुर क्षेत्र में छूट प्रजाति के पेड़ों की आड़ में कथित रूप से अवैध कटान और लकड़ी के परिवहन को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सम्पूर्णानगर रेंज में कटान के बाद लकड़ी को महंगापुर क्षेत्र में डंप किया जा रहा है। वहीं, पलिया रेंज में भी भारी मात्रा में पेड़ों के कटान की चर्चाएं क्षेत्र में बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार ट्रकों के माध्यम से लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है, जिससे हरियाली तेजी से कम होती दिखाई दे रही है। लोगों का सवाल है कि यदि लकड़ी का परिवहन वैध है तो उससे संबंधित आवश्यक अभिलेखों और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि आखिर छूट प्रजाति के पेड़ किस स्थान से काटे जा रहे हैं, इसकी निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के तहत पेड़ों की कटाई एवं परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, भारतीय वन अधिनियम, 1927 में वन उपज के अवैध परिवहन एवं नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उद्देश्य वन क्षेत्रों का संरक्षण एवं उनके अनियंत्रित दोहन को रोकना है।
यदि लकड़ी का व्यावसायिक परिवहन किया जा रहा है, तो संबंधित वैध प्रपत्र, टैक्स इनवॉइस, परिवहन दस्तावेज एवं अन्य आवश्यक अभिलेखों का होना आवश्यक माना जाता है।
ग्रामीणों ने वन विभाग एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध विधिसम्मत एवं कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। हरियाली पर मंडरा रहा यह कथित संकट पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
छूट प्रजाति के नाम पर हरियाली पर संकट
छूट प्रजाति के नाम पर हरियाली पर संकट
(ब्यूरो रिपोर्ट / बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़, लखीमपुर खीरी)
पलिया कलां, लखीमपुर खीरी। महंगापुर क्षेत्र में छूट प्रजाति के पेड़ों की आड़ में कथित रूप से अवैध कटान और लकड़ी के परिवहन को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सम्पूर्णानगर रेंज में कटान के बाद लकड़ी को महंगापुर क्षेत्र में डंप किया जा रहा है। वहीं, पलिया रेंज में भी भारी मात्रा में पेड़ों के कटान की चर्चाएं क्षेत्र में बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार ट्रकों के माध्यम से लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है, जिससे हरियाली तेजी से कम होती दिखाई दे रही है। लोगों का सवाल है कि यदि लकड़ी का परिवहन वैध है तो उससे संबंधित आवश्यक अभिलेखों और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि आखिर छूट प्रजाति के पेड़ किस स्थान से काटे जा रहे हैं, इसकी निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के तहत पेड़ों की कटाई एवं परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, भारतीय वन अधिनियम, 1927 में वन उपज के अवैध परिवहन एवं नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उद्देश्य वन क्षेत्रों का संरक्षण एवं उनके अनियंत्रित दोहन को रोकना है।
यदि लकड़ी का व्यावसायिक परिवहन किया जा रहा है, तो संबंधित वैध प्रपत्र, टैक्स इनवॉइस, परिवहन दस्तावेज एवं अन्य आवश्यक अभिलेखों का होना आवश्यक माना जाता है।
ग्रामीणों ने वन विभाग एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध विधिसम्मत एवं कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। हरियाली पर मंडरा रहा यह कथित संकट पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।






