रिपोर्ट– प्रदेश संवाददाता पत्रकार अतुल कुमार तिवारी ✍️
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लखनऊ :
कानून का दुरुपयोग करके 29 मामलों में लोगों को – एससी/एसटी एक्ट और दुष्कर्म जैसे संगीन मुकदमों में फर्जी तरीके से फंसाने में दोषी करार दिए गए अधिवक्ता परमानंद गुप्ता को एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सजा के साथ ही दोषी वकील पर पांच लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
न्यायालय ने दोषी को विभिन्न न्यायालयों में प्रैक्टिस करने से भी रोक दिया है। आदेश की प्रतिलिपि बार काउंसिल आफ उप्र, इलाहाबाद
लखनऊ की विशेष कोर्ट ने दोषी वकील पर पांच लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
दुष्कर्म व एससी/एसटी के 29 फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे सीबीआइ जांच में हुआ राजफाश
को भेजने का भी आदेश दिया है। परमानंद फर्जी मुकदमे दर्ज कराने के लिए अपनी पत्नी के ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली एक महिला का सहारा लेता था।
अभियोजन की तरफ से उपस्थित विशेष लोक अभियोजक अरविंद मिश्रा ने बताया कि विभूतिखंड के एसीपी राधारमन सिंह ने परमानंद
अधिवक्ता परमानंद गुप्ता
गुप्ता व पूजा रावत के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दर्ज कराया था, जिसमें बताया गया कि परमानंद का संपत्ति को लेकर अरविंद यादव से कोर्ट में विवाद चल रहा था। दोषी की पत्नी संगीता गुप्ता ब्यूटी पार्लर चलाती थी। जहां पर अनुसूचित जाति की पूजा रावत सहायिका के रूप में काम करती थी। परमानंद ने पूजा के एससी होने का फायदा उठाते हुए अपने विरोधियों के विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट, छेड़छाड़ समेत कई मुकदमे दर्ज करवाए थे, जो जांच मे फर्जी पाए गए। पूजा रावत ने न्यायालय में क्षमादान का प्रार्थना पत्र देते हुए कोर्ट को बताया कि वह रोजगार के सिलसिले में गोरखपुर से लखनऊ आई थी। यहां परमानंद की पत्नी के पार्लर में काम करने लगी। वहीं पर परमानंद और उसकी पत्नी ने उसे अपने जाल में फंसा लिया। दबाव में उसने झूठे मुकदमे दर्ज कराए थे। न्यायालय ने उसके क्षमादान प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए सशर्त दोषमुक्त करते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दे दिया।







