Wednesday, August 5, 2026

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*होटल की नौकरी छोड़ी, खेतों में लिखी सफलता की नई इबारत: 24 वर्षीय यशवर्धन पांडेय बने पूर्वांचल के ‘मक्का किंग’** /संवाददाता देवानंद पांडेय

संत कबीर नगर। जहां अधिकांश युवा बेहतर करियर की तलाश में गांव छोड़कर शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के नाथनगर ब्लाक क्षेत्र के तरयापार गांव निवासी 24 वर्षीय यशवर्धन पांडेय ने इसके विपरीत रास्ता चुना। हॉटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने और लखनऊ के एक प्रतिष्ठित होटल में नौकरी करने के बाद उन्होंने शहर की चमक-दमक छोड़ अपने गांव लौटने का निर्णय लिया। आज वही फैसला उन्हें पूर्वांचल के नवोन्मेषी युवा किसानों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर चुका है। जानकारी के अनुसार लगभग दो वर्ष पूर्व यशवर्धन ने क्षेत्र के किसानों को संगठित कर **Nathnagar Agrotech Farmer Producer Company (FPO)** की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसानों के सहयोग से शुरू हुई इस पहल से आज 500 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं और करीब 550 एकड़ क्षेत्र में संगठित रूप से मक्का की खेती की जा रही है। परंपरागत खेती के बजाय वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हुए लाइन-टू-लाइन बुवाई, उन्नत बीजों का उपयोग, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रयोग को बढ़ावा दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मल्टी-क्रॉपिंग मॉडल विकसित किया, जिसके तहत मक्का के साथ धान और आलू की खेती कर खेतों को साल भर उत्पादक बनाए रखा जाता है।
बाजार की मांग को समझते हुए यशवर्धन ने मक्का को अपनी प्रमुख फसल बनाया। वर्तमान समय में डिस्टिलरी उद्योग में मक्का की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने किसानों को इस फसल की ओर प्रेरित किया। उनके नेतृत्व में उत्पादित मक्का की आपूर्ति **India Glycols Limited (IGL)** जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों तक पहुंची है, जिससे किसानों को बेहतर और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध हुआ है।यशवर्धन का मानना है कि खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के साथ एक सफल उद्यम बन सकती है। उनकी पहल ने न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद की है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को यह संदेश भी दिया है कि यदि नवाचार और दूरदृष्टि हो तो गांव की मिट्टी में भी सफलता के बड़े अवसर छिपे हैं।आज यशवर्धन पांडेय की पहचान केवल एक किसान के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वांचल में कृषि नवाचार, किसान संगठन और आधुनिक खेती के युवा प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनकी कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेती को नए नजरिए से देखने का साहस रखते हैं।

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*होटल की नौकरी छोड़ी, खेतों में लिखी सफलता की नई इबारत: 24 वर्षीय यशवर्धन पांडेय बने पूर्वांचल के ‘मक्का किंग’** /संवाददाता देवानंद पांडेय

संत कबीर नगर। जहां अधिकांश युवा बेहतर करियर की तलाश में गांव छोड़कर शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के नाथनगर ब्लाक क्षेत्र के तरयापार गांव निवासी 24 वर्षीय यशवर्धन पांडेय ने इसके विपरीत रास्ता चुना। हॉटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने और लखनऊ के एक प्रतिष्ठित होटल में नौकरी करने के बाद उन्होंने शहर की चमक-दमक छोड़ अपने गांव लौटने का निर्णय लिया। आज वही फैसला उन्हें पूर्वांचल के नवोन्मेषी युवा किसानों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर चुका है। जानकारी के अनुसार लगभग दो वर्ष पूर्व यशवर्धन ने क्षेत्र के किसानों को संगठित कर **Nathnagar Agrotech Farmer Producer Company (FPO)** की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसानों के सहयोग से शुरू हुई इस पहल से आज 500 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं और करीब 550 एकड़ क्षेत्र में संगठित रूप से मक्का की खेती की जा रही है। परंपरागत खेती के बजाय वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हुए लाइन-टू-लाइन बुवाई, उन्नत बीजों का उपयोग, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रयोग को बढ़ावा दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मल्टी-क्रॉपिंग मॉडल विकसित किया, जिसके तहत मक्का के साथ धान और आलू की खेती कर खेतों को साल भर उत्पादक बनाए रखा जाता है।
बाजार की मांग को समझते हुए यशवर्धन ने मक्का को अपनी प्रमुख फसल बनाया। वर्तमान समय में डिस्टिलरी उद्योग में मक्का की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने किसानों को इस फसल की ओर प्रेरित किया। उनके नेतृत्व में उत्पादित मक्का की आपूर्ति **India Glycols Limited (IGL)** जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों तक पहुंची है, जिससे किसानों को बेहतर और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध हुआ है।यशवर्धन का मानना है कि खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के साथ एक सफल उद्यम बन सकती है। उनकी पहल ने न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद की है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को यह संदेश भी दिया है कि यदि नवाचार और दूरदृष्टि हो तो गांव की मिट्टी में भी सफलता के बड़े अवसर छिपे हैं।आज यशवर्धन पांडेय की पहचान केवल एक किसान के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वांचल में कृषि नवाचार, किसान संगठन और आधुनिक खेती के युवा प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनकी कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेती को नए नजरिए से देखने का साहस रखते हैं।

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