संत कबीर नगर। कुछ लोगों के द्वारा यह कहकर सीधी-साधी जनता को बेवकूफ बनाकर घृणा व नफरत पैदा की जाती है कि “मदरसों में आतंकवाद की ट्रेनिंग दी जाती है।” यह पूर्णरूप से गलत निराधार व बेबुनियाद है। उक्त विचार सपा के वरिष्ठ नेता व ज़िला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष आफ़ताब आलम खां ने महुली स्थित अपने जनसंपर्क कार्यालय पर एक प्रेस वार्ता कर व्यक्त किया उन्होंने आगे कहा कि मदरसों में बच्चों के रोएं-रोएं व खून में देश भक्ति तथा वफादारी भरी जाती है, जब बच्चे मदरसों में सुबह पहुंचते हैं तो सबसे पहले उन्हें यह दुआ पढ़ाई जाती है।
“हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत, जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत,
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको नेक जो राह है उस रह पे चलाना मुझको,
हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना,दर्द मंदो से ज़ईफ़ो से मोहब्बत करना” और राष्ट्रगान के रूप में यह पढ़ाया जाता है कि सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तान हमारा, हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलिस्तां हमारा,
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा।
इसके बावजूद यह कहा जाना कि मदरसों में आतंकवाद की ट्रेनिंग दी जाती है यह पूर्णरूप से राजनीति से प्रेरित व वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया गया कृत्य है।
*मदरसों में बच्चों के रोएं-रोएं व ख़ून में देश भक्ति तथा वफादारी भरी जाती है:-आफताब आलम खां* / संवाददाता देवानंद पांडेय
*मदरसों में बच्चों के रोएं-रोएं व ख़ून में देश भक्ति तथा वफादारी भरी जाती है:-आफताब आलम खां* / संवाददाता देवानंद पांडेय
संत कबीर नगर। कुछ लोगों के द्वारा यह कहकर सीधी-साधी जनता को बेवकूफ बनाकर घृणा व नफरत पैदा की जाती है कि “मदरसों में आतंकवाद की ट्रेनिंग दी जाती है।” यह पूर्णरूप से गलत निराधार व बेबुनियाद है। उक्त विचार सपा के वरिष्ठ नेता व ज़िला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष आफ़ताब आलम खां ने महुली स्थित अपने जनसंपर्क कार्यालय पर एक प्रेस वार्ता कर व्यक्त किया उन्होंने आगे कहा कि मदरसों में बच्चों के रोएं-रोएं व खून में देश भक्ति तथा वफादारी भरी जाती है, जब बच्चे मदरसों में सुबह पहुंचते हैं तो सबसे पहले उन्हें यह दुआ पढ़ाई जाती है।
“हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत, जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत,
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको नेक जो राह है उस रह पे चलाना मुझको,
हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना,दर्द मंदो से ज़ईफ़ो से मोहब्बत करना” और राष्ट्रगान के रूप में यह पढ़ाया जाता है कि सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तान हमारा, हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलिस्तां हमारा,
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा।
इसके बावजूद यह कहा जाना कि मदरसों में आतंकवाद की ट्रेनिंग दी जाती है यह पूर्णरूप से राजनीति से प्रेरित व वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया गया कृत्य है।






