Saturday, June 20, 2026

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स्लीपवेल एवं कम्फर्ट ब्रांड की मच्छरमार अगरबत्तीक्रय-विक्रय अथवा भण्डारण करने पर होगी दण्डात्मक कार्यवाही 

  • मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं स्लीपवेल एवं कम्फर्ट ब्रांड की मच्छरमार अगरबत्ती

आमजन को अगरबत्ती प्रयोग न करने की दी गई सलाह

क्रय-विक्रय अथवा भण्डारण करने पर होगी दण्डात्मक कार्रवाई

बहराइच 12 जून। जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रिया नन्दा ने बताया कि बाजारों में मच्छरों को मारने एवं नियंत्रण करने हेतु बिक रहे स्लीपवेल एवं कम्फर्ट ब्रांड की अगरबत्ती जिसमे हरबल, प्राकृतिक, आर्गेनिक तत्व होने की जानकारी दी जाती है जबकि विभिन्न राज्यो के राजकीय प्रयोगशाला तथा भारत सरकार के केन्द्रीय प्रयोगशाला के जॉच में यह तथ्य प्रकाश मे आया है। कि उक्त अगरबत्ती के निर्माण मे अपंजीकृत कीटनाशक विशेष रुप से डाइमेफ्लुथ्रिन एवं मेपरफ्लुथ्रिन का उपयोग हो रहा है। जो कि कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियमावली 1971 की धारा 9 (3) का स्पष्ट रुप से उल्लंघन है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ के दृष्टकोण से डाइमेफ्लुथ्रिन एवं मेपरफ्लुथ्रिन रसायन खतरनाक तथा अत्यन्त जहरीला कीटनाशक रसायन होता है। जिसके लगातार प्रयोग होने से मनुष्य मे फेफड़े, मस्तिष्क, किडनी, पेट व हृदय संबंधी गम्भीर बीमारी होने का खतरा बना रहता है। उन्होंने आमजनमानस को सुझाव दिया है कि स्लीपवेल एवं कम्फर्ट नाम की अगरबत्ती का मच्छर नियंत्रण करने हेतु उपयोग मे न लाए। मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी तथा फुल आस्तीन के वस्त्र का प्रयोग करें।प्रिया नन्दा ने कीटनाशक प्रतिष्ठानों, पेस्ट कंट्रोल आपरेटर्स एवं किराना दुकानों के प्रोपराइटर को निर्देशित किया है कि स्लीपवेल एवं कम्फर्ट ब्राण्ड की अगरबत्ती का क्रय-विक्रय अथवा भण्डारण न करें। औचक निरीक्षण करने पर किसी प्रतिष्ठान में उक्त ब्राण्ड की अगरबत्ती पाये जाने पर सम्बन्धित के विरूद्व कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियमावली 1971 के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध मानते हुए नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जायेगी।

 

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स्लीपवेल एवं कम्फर्ट ब्रांड की मच्छरमार अगरबत्तीक्रय-विक्रय अथवा भण्डारण करने पर होगी दण्डात्मक कार्यवाही 

  • मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं स्लीपवेल एवं कम्फर्ट ब्रांड की मच्छरमार अगरबत्ती

आमजन को अगरबत्ती प्रयोग न करने की दी गई सलाह

क्रय-विक्रय अथवा भण्डारण करने पर होगी दण्डात्मक कार्रवाई

बहराइच 12 जून। जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रिया नन्दा ने बताया कि बाजारों में मच्छरों को मारने एवं नियंत्रण करने हेतु बिक रहे स्लीपवेल एवं कम्फर्ट ब्रांड की अगरबत्ती जिसमे हरबल, प्राकृतिक, आर्गेनिक तत्व होने की जानकारी दी जाती है जबकि विभिन्न राज्यो के राजकीय प्रयोगशाला तथा भारत सरकार के केन्द्रीय प्रयोगशाला के जॉच में यह तथ्य प्रकाश मे आया है। कि उक्त अगरबत्ती के निर्माण मे अपंजीकृत कीटनाशक विशेष रुप से डाइमेफ्लुथ्रिन एवं मेपरफ्लुथ्रिन का उपयोग हो रहा है। जो कि कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियमावली 1971 की धारा 9 (3) का स्पष्ट रुप से उल्लंघन है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ के दृष्टकोण से डाइमेफ्लुथ्रिन एवं मेपरफ्लुथ्रिन रसायन खतरनाक तथा अत्यन्त जहरीला कीटनाशक रसायन होता है। जिसके लगातार प्रयोग होने से मनुष्य मे फेफड़े, मस्तिष्क, किडनी, पेट व हृदय संबंधी गम्भीर बीमारी होने का खतरा बना रहता है। उन्होंने आमजनमानस को सुझाव दिया है कि स्लीपवेल एवं कम्फर्ट नाम की अगरबत्ती का मच्छर नियंत्रण करने हेतु उपयोग मे न लाए। मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी तथा फुल आस्तीन के वस्त्र का प्रयोग करें।प्रिया नन्दा ने कीटनाशक प्रतिष्ठानों, पेस्ट कंट्रोल आपरेटर्स एवं किराना दुकानों के प्रोपराइटर को निर्देशित किया है कि स्लीपवेल एवं कम्फर्ट ब्राण्ड की अगरबत्ती का क्रय-विक्रय अथवा भण्डारण न करें। औचक निरीक्षण करने पर किसी प्रतिष्ठान में उक्त ब्राण्ड की अगरबत्ती पाये जाने पर सम्बन्धित के विरूद्व कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियमावली 1971 के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध मानते हुए नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जायेगी।

 

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