संत कबीर नगर। जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने 10 से कम नामांकन वाले 611 परिषदीय विद्यालयों के समस्त स्टाफ का वेतन रोकने का आदेश जारी किया है।यह कार्यवाही नये शैक्षिक सत्र 2026-27 में नामांकन बढ़ाने में लापरवाही के आरोप में की गई है। बीएसए के अनुसार शैक्षिक सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ माह बीत चुके हैं लेकिन कई विद्यालयों में नामांकन की स्थिति बेहद खराब पायी गई है। विभाग की ओर से नामांकन बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चलाये जा रहें हैं, इसके साथ ही साथ शिक्षकों को घर- घर संपर्क कर अभिभावकों को जागरूक करने और विद्यालयों में गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि विभागीय प्रयासों के बावजूद नामांकन में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने पर 10 से कम नामांकन वाले 611 विद्यालयों के स्टाफ पर यह कार्यवाही की गई है। बीएसए ने साफ कहा है कि संबंधित स्टाफ ” कार्य नहीं तो वेतन नहीं ” के सिद्धांत के तहत कार्य में लापरवाही बरत रहा था। आदेश के मुताबिक सभी संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन तब तक बाधित रहेगा ,जब तक दो दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं।
*संत कबीर नगर बीएसए ने 611 स्कूलों के स्टाफ का रोका वेतन: 10 से कम नामांकन पर सख्ती; दो दिन में प्रवेश बढ़ाने के निर्देश* जिला संवाददाता देवानंद पांडेय
*संत कबीर नगर बीएसए ने 611 स्कूलों के स्टाफ का रोका वेतन: 10 से कम नामांकन पर सख्ती; दो दिन में प्रवेश बढ़ाने के निर्देश* जिला संवाददाता देवानंद पांडेय
संत कबीर नगर। जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने 10 से कम नामांकन वाले 611 परिषदीय विद्यालयों के समस्त स्टाफ का वेतन रोकने का आदेश जारी किया है।यह कार्यवाही नये शैक्षिक सत्र 2026-27 में नामांकन बढ़ाने में लापरवाही के आरोप में की गई है। बीएसए के अनुसार शैक्षिक सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ माह बीत चुके हैं लेकिन कई विद्यालयों में नामांकन की स्थिति बेहद खराब पायी गई है। विभाग की ओर से नामांकन बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चलाये जा रहें हैं, इसके साथ ही साथ शिक्षकों को घर- घर संपर्क कर अभिभावकों को जागरूक करने और विद्यालयों में गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि विभागीय प्रयासों के बावजूद नामांकन में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने पर 10 से कम नामांकन वाले 611 विद्यालयों के स्टाफ पर यह कार्यवाही की गई है। बीएसए ने साफ कहा है कि संबंधित स्टाफ ” कार्य नहीं तो वेतन नहीं ” के सिद्धांत के तहत कार्य में लापरवाही बरत रहा था। आदेश के मुताबिक सभी संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन तब तक बाधित रहेगा ,जब तक दो दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं।






