Wednesday, August 5, 2026

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*पंजीकृत एवं अनुमोदित कीटनाशियों का ही विक्रय किया जाए/जिला कृषि रक्षा अधिकारी* /संवाददाता देवानंद पांडेय

संत कबीर नगर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ0 सर्वेश यादव ने बताया है कि समस्त पेस्टीसाइड विक्रेताओं, निर्माताओं, विपणन फर्माें तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एवं उनके माध्यम से कीटनाशी रसायनों का विक्रय करने वाली इकाइयों को सूचित किया है कि कीटनाशियों का निर्माण, आयात, भण्डारण, विक्रय वितरण एवं उपयोग भारत सरकार द्वारा अधिसूचित कीटनाशी अधिनियम 1968 तथा कीटनाशी नियम 1971 के प्रावधानों के अधीन विनियमति हैं। सभी पंजीकृत पेस्टीसाइड विक्रेता यह सुनिश्चित करें कि उनके प्रतिष्ठान पर वैध लाइसेंस उपलब्ध हो तथा केवल पंजीकृत एवं अनुमोदित कीटनाशियों का ही विक्रय किया जाए। प्रत्येक विक्रय का अभिलेख नियमानुसार संधारित किया जाए तथा विक्रय किए जाने वाले उत्पादों पर निर्धारित लेबल, बैच संख्या, निर्माण एवं समाप्ति तिथि तथा अन्य आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से अंकित किया जाय। उन्होंने बताया कि कुछ विक्रेता एवं फर्में बिना वैध लाइसेंस अथवा विधिक अनुमति के ई-कॉमर्स माध्यमों से कीटनाशी उत्पादों का विक्रय एवं वितरण कर रही हैं, जो कि कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं कीटनाशी नियम 1971 के प्रावधानों का उल्लंघन है। ऐसे अवैध व्यापार, बिना लाइसेंस ऑनलाइन विक्रय अथवा अपंजीकृत एवं प्रतिबंधित उत्पादों के विपणन पर संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरूद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी। समस्त ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन विक्रेताओं एवं वितरण एजेंसियों को निर्देशित किया जाता है कि वे केवल विधिवत लाइसेंसधारी एवं अधिकृत विक्रेताओं के उत्पादों को ही अपने प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित एवं विक्रय हेतु उपलब्ध कराएं तथा संबंधित अभिलेखों एवं अनुमतियों का सत्यापन सुनिश्चित किया जाय।
जनपद के कृषकों से भी अपील की जाती है कि वे केवल अधिकृत एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही कीटनाशी क्रय करें तथा किसी भी ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यम से संदिग्ध, अपंजीकृत अथवा प्रतिबंधित उत्पादों के विक्रय की सूचना तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला कृषि रक्षा कार्यालय को उपलब्ध कराएं। कीटनाशियों का सुरक्षित, वैधानिक एवं जिम्मेदार उपयोग न केवल किसानों के हितों की रक्षा करता है बल्कि मानव स्वास्थ्य, पशुधन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

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*पंजीकृत एवं अनुमोदित कीटनाशियों का ही विक्रय किया जाए/जिला कृषि रक्षा अधिकारी* /संवाददाता देवानंद पांडेय

संत कबीर नगर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ0 सर्वेश यादव ने बताया है कि समस्त पेस्टीसाइड विक्रेताओं, निर्माताओं, विपणन फर्माें तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एवं उनके माध्यम से कीटनाशी रसायनों का विक्रय करने वाली इकाइयों को सूचित किया है कि कीटनाशियों का निर्माण, आयात, भण्डारण, विक्रय वितरण एवं उपयोग भारत सरकार द्वारा अधिसूचित कीटनाशी अधिनियम 1968 तथा कीटनाशी नियम 1971 के प्रावधानों के अधीन विनियमति हैं। सभी पंजीकृत पेस्टीसाइड विक्रेता यह सुनिश्चित करें कि उनके प्रतिष्ठान पर वैध लाइसेंस उपलब्ध हो तथा केवल पंजीकृत एवं अनुमोदित कीटनाशियों का ही विक्रय किया जाए। प्रत्येक विक्रय का अभिलेख नियमानुसार संधारित किया जाए तथा विक्रय किए जाने वाले उत्पादों पर निर्धारित लेबल, बैच संख्या, निर्माण एवं समाप्ति तिथि तथा अन्य आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से अंकित किया जाय। उन्होंने बताया कि कुछ विक्रेता एवं फर्में बिना वैध लाइसेंस अथवा विधिक अनुमति के ई-कॉमर्स माध्यमों से कीटनाशी उत्पादों का विक्रय एवं वितरण कर रही हैं, जो कि कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं कीटनाशी नियम 1971 के प्रावधानों का उल्लंघन है। ऐसे अवैध व्यापार, बिना लाइसेंस ऑनलाइन विक्रय अथवा अपंजीकृत एवं प्रतिबंधित उत्पादों के विपणन पर संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरूद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी। समस्त ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन विक्रेताओं एवं वितरण एजेंसियों को निर्देशित किया जाता है कि वे केवल विधिवत लाइसेंसधारी एवं अधिकृत विक्रेताओं के उत्पादों को ही अपने प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित एवं विक्रय हेतु उपलब्ध कराएं तथा संबंधित अभिलेखों एवं अनुमतियों का सत्यापन सुनिश्चित किया जाय।
जनपद के कृषकों से भी अपील की जाती है कि वे केवल अधिकृत एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही कीटनाशी क्रय करें तथा किसी भी ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यम से संदिग्ध, अपंजीकृत अथवा प्रतिबंधित उत्पादों के विक्रय की सूचना तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला कृषि रक्षा कार्यालय को उपलब्ध कराएं। कीटनाशियों का सुरक्षित, वैधानिक एवं जिम्मेदार उपयोग न केवल किसानों के हितों की रक्षा करता है बल्कि मानव स्वास्थ्य, पशुधन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

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