Thursday, April 16, 2026

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अणु से पारिस्थितिकी तंत्र तक: स्थाई संसाधन प्रबंधन से वैश्विक समाधान’ विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन संपन्न

रिपोर्ट – प्रदेश संवाददाता, पत्रकार अतुल कुमार तिवारी

बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़ BBN

तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय जौनपुर में चल रही “अणु से पारिस्थितिकी तंत्र तक : स्थाई संसाधन प्रबंधन से वैश्विक समाधान” विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

सत्र में डॉ. एस. डी. कौशिक (बीएआरसी, मुंबई), डॉ. अनवर अली (मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट, जर्मनी), डॉ. पवन कुमार (डीएमआईएचईआर, वर्धा), विश्वपाल (आईआईटी रोपड़), प्रो. संतोष कुमार (पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर), डॉ. अखिलेश कुमार (ईवा वूमेन्स यूनिवर्सिटी, साउथ अफ्रीका) तथा डॉ. रविंद्र सिंह (यूएसए) ने रासायनिक विषविज्ञान में एडवांस मास स्पेक्ट्रोस्कॉपी तकनीक के महत्व तथा नियामक अनुसंधान में इसके उपयोग पर प्रकाश डाला।

डॉ. रश्मि सिंह (एमएमएच कॉलेज, गाजियाबाद) ने जूनोटिक रोगों की आणविक निगरानी की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए बताया कि पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

प्रो. सैमुअल राज (एसआरएम विश्वविद्यालय, सोनीपत) ने औषधीय दवाओं के दुष्प्रभावों को कम करते हुए उनकी चिकित्सकीय प्रभावशीलता बढ़ाने के उपायों पर अपने विचार रखे। डॉ. जयेंद्र नाथ शुक्ल (केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान) ने स्पोडोप्टेरा फ्रूगीपर्डा की पहचान में जैव-सूचना विज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. प्रदीप बी. पाटील (आईसीएमआर, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान) ने विषाणु विज्ञान में पशु मॉडलों की उपयोगिता पर जानकारी दी।

डॉ. स्नेहा मिश्रा ने विषविज्ञान के अध्ययन में ड्रोसोफिला मॉडल के महत्व को स्पष्ट किया। डॉ. पल्लवी सिन्हा (रायपुर) ने बायोहाइड्रोजन उत्पादन तथा बायोवेस्ट के सतत उपयोग हेतु स्मार्ट फर्मेंटेशन तकनीक पर विचार साझा किए। डॉ. अतुल त्रिवेदी (बस्तर) ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के बीच डिजिटल एवं मोबाइल बैंकिंग के प्रसार पर चर्चा की।

डॉ. राम चंद्र मौर्य (कुमाऊँ विश्वविद्यालय) ने दीर्घकालिक तनाव के कारण नवजात चूजों के मस्तिष्क में होने वाले न्यूरोनल परिवर्तनों पर अपने शोध प्रस्तुत किए। कृषि सत्र में डॉ. संतोष कुमार ने मक्के की बीमारियों के जैविक नियंत्रण, प्रो. शैलेंद्र विक्रम सिंह (एसडीजे कॉलेज, आजमगढ़) ने स्ट्रॉबेरी उत्पादन तकनीक तथा डॉ. मुकुल दत्त पांडेय ने ‘श्री अन्न’ के महत्व पर व्याख्यान दिया।

प्रो. बृजेश सिंह (एसएमएमटीडी कॉलेज, बलिया) ने भारतीय कृषि की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. महेश कुमार सिंह (बीएयू, भागलपुर) ने जल संरक्षण पर ऑनलाइन प्रस्तुति दी। इसके अतिरिक्त डॉ. आनंद, डॉ. सत्यम, श्रीमती वर्षा गुप्ता सहित कई शोधार्थियों ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य प्रो. राम आसरे सिंह ने किया। संगोष्ठी में प्रो. विजय कुमार सिंह, प्रो. राहुल सिंह, प्रो. रमेश सिंह, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. विजयलक्ष्मी सिंह, डॉ. मानसिंह, डॉ. प्रेमचंद, डॉ. अजय कुमार, डॉ. देवव्रत मिश्र, डॉ. शैलेंद्र सिंह वत्स, डॉ. आशुतोष मिश्रा सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशा रानी ने किया तथा अंत में संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एस. के. वर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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अणु से पारिस्थितिकी तंत्र तक: स्थाई संसाधन प्रबंधन से वैश्विक समाधान’ विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन संपन्न

रिपोर्ट – प्रदेश संवाददाता, पत्रकार अतुल कुमार तिवारी

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तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय जौनपुर में चल रही “अणु से पारिस्थितिकी तंत्र तक : स्थाई संसाधन प्रबंधन से वैश्विक समाधान” विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

सत्र में डॉ. एस. डी. कौशिक (बीएआरसी, मुंबई), डॉ. अनवर अली (मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट, जर्मनी), डॉ. पवन कुमार (डीएमआईएचईआर, वर्धा), विश्वपाल (आईआईटी रोपड़), प्रो. संतोष कुमार (पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर), डॉ. अखिलेश कुमार (ईवा वूमेन्स यूनिवर्सिटी, साउथ अफ्रीका) तथा डॉ. रविंद्र सिंह (यूएसए) ने रासायनिक विषविज्ञान में एडवांस मास स्पेक्ट्रोस्कॉपी तकनीक के महत्व तथा नियामक अनुसंधान में इसके उपयोग पर प्रकाश डाला।

डॉ. रश्मि सिंह (एमएमएच कॉलेज, गाजियाबाद) ने जूनोटिक रोगों की आणविक निगरानी की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए बताया कि पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

प्रो. सैमुअल राज (एसआरएम विश्वविद्यालय, सोनीपत) ने औषधीय दवाओं के दुष्प्रभावों को कम करते हुए उनकी चिकित्सकीय प्रभावशीलता बढ़ाने के उपायों पर अपने विचार रखे। डॉ. जयेंद्र नाथ शुक्ल (केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान) ने स्पोडोप्टेरा फ्रूगीपर्डा की पहचान में जैव-सूचना विज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. प्रदीप बी. पाटील (आईसीएमआर, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान) ने विषाणु विज्ञान में पशु मॉडलों की उपयोगिता पर जानकारी दी।

डॉ. स्नेहा मिश्रा ने विषविज्ञान के अध्ययन में ड्रोसोफिला मॉडल के महत्व को स्पष्ट किया। डॉ. पल्लवी सिन्हा (रायपुर) ने बायोहाइड्रोजन उत्पादन तथा बायोवेस्ट के सतत उपयोग हेतु स्मार्ट फर्मेंटेशन तकनीक पर विचार साझा किए। डॉ. अतुल त्रिवेदी (बस्तर) ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के बीच डिजिटल एवं मोबाइल बैंकिंग के प्रसार पर चर्चा की।

डॉ. राम चंद्र मौर्य (कुमाऊँ विश्वविद्यालय) ने दीर्घकालिक तनाव के कारण नवजात चूजों के मस्तिष्क में होने वाले न्यूरोनल परिवर्तनों पर अपने शोध प्रस्तुत किए। कृषि सत्र में डॉ. संतोष कुमार ने मक्के की बीमारियों के जैविक नियंत्रण, प्रो. शैलेंद्र विक्रम सिंह (एसडीजे कॉलेज, आजमगढ़) ने स्ट्रॉबेरी उत्पादन तकनीक तथा डॉ. मुकुल दत्त पांडेय ने ‘श्री अन्न’ के महत्व पर व्याख्यान दिया।

प्रो. बृजेश सिंह (एसएमएमटीडी कॉलेज, बलिया) ने भारतीय कृषि की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. महेश कुमार सिंह (बीएयू, भागलपुर) ने जल संरक्षण पर ऑनलाइन प्रस्तुति दी। इसके अतिरिक्त डॉ. आनंद, डॉ. सत्यम, श्रीमती वर्षा गुप्ता सहित कई शोधार्थियों ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य प्रो. राम आसरे सिंह ने किया। संगोष्ठी में प्रो. विजय कुमार सिंह, प्रो. राहुल सिंह, प्रो. रमेश सिंह, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. विजयलक्ष्मी सिंह, डॉ. मानसिंह, डॉ. प्रेमचंद, डॉ. अजय कुमार, डॉ. देवव्रत मिश्र, डॉ. शैलेंद्र सिंह वत्स, डॉ. आशुतोष मिश्रा सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशा रानी ने किया तथा अंत में संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एस. के. वर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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