संत कबीर नगर। जनपद में खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि रात के अंधेरों में करीब 12.00 से लेकर 3:00 बजे भोर रात तक बिना किसी जिम्मेदार विभागीय अधिकारी के आदेश के अवैध रूप से मिट्टी का खनन जोरों से किया जा रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण बीती रात खनन माफियाओं द्वारा थाना कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र अंतर्गत जंगल कला में बैनामा सुदा जमीन जिसका रकबा 10 विस्वा है, उसका खनन माफिया द्वारा रात में तीन-चार डंपर के साथ मिट्टी खनन का काम कर रहे थे। सूचना मिलने पर भू मालिक द्वारा मौके पर पहुंचकर वस्तु स्थिति से अवगत होने की कोशिश किया गया तभी खनन माफियाओं द्वारा अपनी जेसीबी और डंपर को लेकर रातों-रात फरार हो गए। भू- स्वामी द्वारा रातों-रात थाना कोतवाली पहुंचकर अपने लिखित प्रार्थना पत्र के माध्यम से कोतवाली प्रभारी खलीलाबाद को दिया। जिसमें भू-स्वामी द्वारा मौके पर मिट्टी खनन करते माफियाओं के वाहनों का फोटोग्राफ व तहरीर देते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। खबर लिखे जाने तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो पाया था। ऐसे में अब देखना यह है कि क्या खनन माफियाओं के ऊपर पुलिस कोई संवैधानिक कार्रवाई करती है या मामले को रद्दी की टोकरी में डाल देती है।
*जनपद में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद; रात के अंधेरे में करते हैं मिट्टी की खुदाई* / संवाददाता देवानंद पांडेय
संत कबीर नगर। जनपद में खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि रात के अंधेरों में करीब 12.00 से लेकर 3:00 बजे भोर रात तक बिना किसी जिम्मेदार विभागीय अधिकारी के आदेश के अवैध रूप से मिट्टी का खनन जोरों से किया जा रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण बीती रात खनन माफियाओं द्वारा थाना कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र अंतर्गत जंगल कला में बैनामा सुदा जमीन जिसका रकबा 10 विस्वा है, उसका खनन माफिया द्वारा रात में तीन-चार डंपर के साथ मिट्टी खनन का काम कर रहे थे। सूचना मिलने पर भू मालिक द्वारा मौके पर पहुंचकर वस्तु स्थिति से अवगत होने की कोशिश किया गया तभी खनन माफियाओं द्वारा अपनी जेसीबी और डंपर को लेकर रातों-रात फरार हो गए। भू- स्वामी द्वारा रातों-रात थाना कोतवाली पहुंचकर अपने लिखित प्रार्थना पत्र के माध्यम से कोतवाली प्रभारी खलीलाबाद को दिया। जिसमें भू-स्वामी द्वारा मौके पर मिट्टी खनन करते माफियाओं के वाहनों का फोटोग्राफ व तहरीर देते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। खबर लिखे जाने तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो पाया था। ऐसे में अब देखना यह है कि क्या खनन माफियाओं के ऊपर पुलिस कोई संवैधानिक कार्रवाई करती है या मामले को रद्दी की टोकरी में डाल देती है।






