Thursday, April 16, 2026

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अणु से पारितंत्र तक : सतत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा

रिपोर्ट– प्रदेश संवाददाता, पत्रकार अतुल कुमार तिवारी

बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़ BBN

 

अणु से पारितंत्र तक : सतत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन विभिन्न विषयों के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अपने अनुसंधान तथा विचार प्रस्तुत किए। इस दिन के सत्रों में तंत्रिका विज्ञान, उत्क्रांति जीवविज्ञान, तनाव विज्ञान, संगणकीय जीनोमिक्स, क्वांटम विज्ञान, जलवायु परिवर्तन, मृदा विज्ञान, कृषि अनुसंधान, पर्यावरणीय स्वास्थ्य तथा प्राणी व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इन व्याख्यानों ने उपस्थित प्रतिभागियों को समकालीन वैज्ञानिक चुनौतियों और उनके समाधान की दिशा में नई दृष्टि प्रदान की।

कार्यक्रम का प्रारम्भ डॉ. अमित कुमार के व्याख्यान से हुआ, जो बर्क न्यूरोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, वील कॉर्नेल मेडिसिन, न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) से संबद्ध हैं। उनका व्याख्यान “द स्वीट स्टोरी ऑफ ग्लूकोज़ : हाउ अ सिंपल मॉलिक्यूल शेप्स आवर मेमोरी” विषय पर आधारित था। उन्होंने बताया कि ग्लूकोज़ मस्तिष्क के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और यह स्मृति निर्माण तथा सीखने की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसके पश्चात डॉ. तान्या वर्मा ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया, जो यूनिवर्सिटी ऑफ विनिपेग, कनाडा के जीवविज्ञान विभाग से संबद्ध हैं। उनके व्याख्यान का विषय “फास्ट बट नॉट फ्यूरियस : सेलेक्शन फॉर शॉर्टर लाइफस्पैन एंड इट्स इम्पैक्ट ऑन रिप्रोडक्टिव ट्रेट्स इन ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर” था। उन्होंने फल-मक्खी को अध्ययन के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए जीवनकाल और प्रजनन के बीच संबंधों पर प्रकाश डाला।

अगले सत्र में डॉ. अशोक कुमार दतुसालिया, राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, रायबरेली में सह-आचार्य हैं, ने “स्ट्रेस वल्नरेबिलिटी एंड रेज़िलिएंस बिहेवियर : मॉलिक्यूलर एंड स्ट्रक्चरल कोरिलेट्स” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मस्तिष्क में होने वाले सूक्ष्म जैविक और संरचनात्मक परिवर्तनों के माध्यम से तनाव के प्रभावों को समझाया।

इसके पश्चात डॉ. सारिका साहू, भारतीय कृषि सांख्यिकीय अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली की वैज्ञानिक, ने “कम्प्यूटेशनल जीनोमिक्स इन द एरा ऑफ क्लाइमेट चेंज” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक संगणकीय तकनीकों और जीन संबंधी आँकड़ों की सहायता से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन कैसे किया जा रहा है।

इसके बाद प्रोफेसर संजीव कुमार, पंजाब अभियांत्रिकी महाविद्यालय, चंडीगढ़ से संबद्ध, ने “क्वांटम फिजिक्स टू क्वांटम कम्प्यूटिंग” विषय पर व्याख्यान दिया और क्वांटम सिद्धांतों से आधुनिक संगणना प्रणाली तक की वैज्ञानिक यात्रा को सरल रूप में प्रस्तुत किया।

पर्यावरणीय विषयों पर विचार रखते हुए प्रोफेसर अनामिका सिंह, भूगोल विभाग, आर. एस. के. डी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जौनपुर से संबद्ध, ने “क्लाइमेट चेंज मिटिगेशन एंड अडैप्टेशन स्ट्रैटेजीज” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए और पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर प्रकाश डाला।

प्राणी विज्ञान के क्षेत्र से डॉ. प्रशांत कुमार, प्राणी विज्ञान विभाग, साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से संबद्ध, ने “एवियन इंटेलिजेंस” विषय पर रोचक व्याख्यान दिया। उन्होंने पक्षियों की स्मरण शक्ति, समस्या समाधान क्षमता, संचार तथा उपकरणों के उपयोग जैसी विशेषताओं पर चर्चा की।

इसके पश्चात काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रोफेसर पी. के. शर्मा ने “सॉइल अंडर थ्रेट : अंडरस्टैंडिंग माइक्रोप्लास्टिक इम्पैक्ट्स टू स्ट्रेंथन नेचर-बेस्ड अप्रोचेज फॉर क्लाइमेट एंड सॉइल हेल्थ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मृदा में बढ़ते सूक्ष्म प्लास्टिक प्रदूषण और उसके पारिस्थितिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. चक्रवर्ती, पूर्व एडीजी पौध संरक्षण आईसीएआर नई दिल्ली और एएसआरबी, नई दिल्ली के सदस्य के रूप में अपना कार्य सम्पादन किये हैं . कृषि रसायनो के उपयोग एवं नीति के ऊपर अपना विचार प्रस्तुत करें

इसके बाद भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर से डॉ. राघवेंद्र सिंह ने आभासी माध्यम से “कार्बन फार्मिंग इन इंडिया : चैलेंजेज, ऑपर्च्युनिटीज एंड द वे फॉरवर्ड” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कृषि के माध्यम से कार्बन संचयन की संभावनाओं और उससे जुड़ी चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

इसके पश्चात प्रोफेसर हेमंत कुमार सिंह, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या से संबद्ध, ने “रीसेंट एडवांसेज़ इन इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ मैनेजमेंट ऑफ आंवला (एम्ब्लिका ऑफिसिनेलिस एल.) रस्ट (रेवेनालिया एम्ब्लिके स्टाइड.)” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आँवला फसल में रस्ट डिज़ीज़ के प्रबंधन के नवीन उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

दिन का अंतिम व्याख्यान डॉ. किरण गुप्ता, नेहरू ग्राम भारती डीम्ड विश्वविद्यालय, प्रयागराज से संबद्ध, द्वारा प्रस्तुत किया गया। उनके व्याख्यान का विषय “ह्यूमन हेल्थ रिस्क असेसमेंट ऑफ हेवी मेटल ज़ेनोबायोटिक्स इन ड्रिंकिंग वाटर” था। उन्होंने पेयजल में भारी धातुओं के प्रदूषण और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में विस्तार से बताया।

इस प्रकार अणु से पारितंत्र तक : सतत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा विषय पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का तृतीय दिवस अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के व्याख्यानों ने प्रतिभागियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा से अवगत कराया तथा बहुविषयक सहयोग की आवश्यकता को भी स्पष्ट किया।

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अणु से पारितंत्र तक : सतत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा

रिपोर्ट– प्रदेश संवाददाता, पत्रकार अतुल कुमार तिवारी

बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़ BBN

 

अणु से पारितंत्र तक : सतत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन विभिन्न विषयों के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अपने अनुसंधान तथा विचार प्रस्तुत किए। इस दिन के सत्रों में तंत्रिका विज्ञान, उत्क्रांति जीवविज्ञान, तनाव विज्ञान, संगणकीय जीनोमिक्स, क्वांटम विज्ञान, जलवायु परिवर्तन, मृदा विज्ञान, कृषि अनुसंधान, पर्यावरणीय स्वास्थ्य तथा प्राणी व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इन व्याख्यानों ने उपस्थित प्रतिभागियों को समकालीन वैज्ञानिक चुनौतियों और उनके समाधान की दिशा में नई दृष्टि प्रदान की।

कार्यक्रम का प्रारम्भ डॉ. अमित कुमार के व्याख्यान से हुआ, जो बर्क न्यूरोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, वील कॉर्नेल मेडिसिन, न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) से संबद्ध हैं। उनका व्याख्यान “द स्वीट स्टोरी ऑफ ग्लूकोज़ : हाउ अ सिंपल मॉलिक्यूल शेप्स आवर मेमोरी” विषय पर आधारित था। उन्होंने बताया कि ग्लूकोज़ मस्तिष्क के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और यह स्मृति निर्माण तथा सीखने की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसके पश्चात डॉ. तान्या वर्मा ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया, जो यूनिवर्सिटी ऑफ विनिपेग, कनाडा के जीवविज्ञान विभाग से संबद्ध हैं। उनके व्याख्यान का विषय “फास्ट बट नॉट फ्यूरियस : सेलेक्शन फॉर शॉर्टर लाइफस्पैन एंड इट्स इम्पैक्ट ऑन रिप्रोडक्टिव ट्रेट्स इन ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर” था। उन्होंने फल-मक्खी को अध्ययन के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए जीवनकाल और प्रजनन के बीच संबंधों पर प्रकाश डाला।

अगले सत्र में डॉ. अशोक कुमार दतुसालिया, राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, रायबरेली में सह-आचार्य हैं, ने “स्ट्रेस वल्नरेबिलिटी एंड रेज़िलिएंस बिहेवियर : मॉलिक्यूलर एंड स्ट्रक्चरल कोरिलेट्स” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मस्तिष्क में होने वाले सूक्ष्म जैविक और संरचनात्मक परिवर्तनों के माध्यम से तनाव के प्रभावों को समझाया।

इसके पश्चात डॉ. सारिका साहू, भारतीय कृषि सांख्यिकीय अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली की वैज्ञानिक, ने “कम्प्यूटेशनल जीनोमिक्स इन द एरा ऑफ क्लाइमेट चेंज” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक संगणकीय तकनीकों और जीन संबंधी आँकड़ों की सहायता से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन कैसे किया जा रहा है।

इसके बाद प्रोफेसर संजीव कुमार, पंजाब अभियांत्रिकी महाविद्यालय, चंडीगढ़ से संबद्ध, ने “क्वांटम फिजिक्स टू क्वांटम कम्प्यूटिंग” विषय पर व्याख्यान दिया और क्वांटम सिद्धांतों से आधुनिक संगणना प्रणाली तक की वैज्ञानिक यात्रा को सरल रूप में प्रस्तुत किया।

पर्यावरणीय विषयों पर विचार रखते हुए प्रोफेसर अनामिका सिंह, भूगोल विभाग, आर. एस. के. डी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जौनपुर से संबद्ध, ने “क्लाइमेट चेंज मिटिगेशन एंड अडैप्टेशन स्ट्रैटेजीज” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए और पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर प्रकाश डाला।

प्राणी विज्ञान के क्षेत्र से डॉ. प्रशांत कुमार, प्राणी विज्ञान विभाग, साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से संबद्ध, ने “एवियन इंटेलिजेंस” विषय पर रोचक व्याख्यान दिया। उन्होंने पक्षियों की स्मरण शक्ति, समस्या समाधान क्षमता, संचार तथा उपकरणों के उपयोग जैसी विशेषताओं पर चर्चा की।

इसके पश्चात काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रोफेसर पी. के. शर्मा ने “सॉइल अंडर थ्रेट : अंडरस्टैंडिंग माइक्रोप्लास्टिक इम्पैक्ट्स टू स्ट्रेंथन नेचर-बेस्ड अप्रोचेज फॉर क्लाइमेट एंड सॉइल हेल्थ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मृदा में बढ़ते सूक्ष्म प्लास्टिक प्रदूषण और उसके पारिस्थितिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. चक्रवर्ती, पूर्व एडीजी पौध संरक्षण आईसीएआर नई दिल्ली और एएसआरबी, नई दिल्ली के सदस्य के रूप में अपना कार्य सम्पादन किये हैं . कृषि रसायनो के उपयोग एवं नीति के ऊपर अपना विचार प्रस्तुत करें

इसके बाद भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर से डॉ. राघवेंद्र सिंह ने आभासी माध्यम से “कार्बन फार्मिंग इन इंडिया : चैलेंजेज, ऑपर्च्युनिटीज एंड द वे फॉरवर्ड” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कृषि के माध्यम से कार्बन संचयन की संभावनाओं और उससे जुड़ी चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

इसके पश्चात प्रोफेसर हेमंत कुमार सिंह, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या से संबद्ध, ने “रीसेंट एडवांसेज़ इन इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ मैनेजमेंट ऑफ आंवला (एम्ब्लिका ऑफिसिनेलिस एल.) रस्ट (रेवेनालिया एम्ब्लिके स्टाइड.)” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आँवला फसल में रस्ट डिज़ीज़ के प्रबंधन के नवीन उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

दिन का अंतिम व्याख्यान डॉ. किरण गुप्ता, नेहरू ग्राम भारती डीम्ड विश्वविद्यालय, प्रयागराज से संबद्ध, द्वारा प्रस्तुत किया गया। उनके व्याख्यान का विषय “ह्यूमन हेल्थ रिस्क असेसमेंट ऑफ हेवी मेटल ज़ेनोबायोटिक्स इन ड्रिंकिंग वाटर” था। उन्होंने पेयजल में भारी धातुओं के प्रदूषण और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में विस्तार से बताया।

इस प्रकार अणु से पारितंत्र तक : सतत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा विषय पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का तृतीय दिवस अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के व्याख्यानों ने प्रतिभागियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा से अवगत कराया तथा बहुविषयक सहयोग की आवश्यकता को भी स्पष्ट किया।

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