रिपोर्ट– प्रदेश संवाददाता पत्रकार अतुल कुमार तिवारी
बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज़ BBN

“थायरॉइड क्या है. थायरॉइड हार्मोन कैसे काम करते हैं? थायरॉइड हार्मोन के कम और ज्यादा होने से क्या होता है. जानें ऐसे और भी बहुत से सवालों के जवाब”
थायरॉइड गले में पाई जाने वाली एक तरह की ग्रंथि है. ये ग्रंथि तितली के आकार के होती है. और गले के सामने वाले हिस्से, स्वरयंत्र (vocal cord) के नीचे की ओर पायी जाती है. जो मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करती है. इस बीमारी से ग्रस्त लोगों में यह ग्रंथि सामान्य तरीके से काम नहीं करती. इसमें थायरॉइड हारमोन बनना कम या ज्यादा हो जाता है।
थायॉइड ग्रंथि में छोटी-छोटी थैली जैसे टुकड़े होते हैं. जिनमें गाढ़ा द्रव होता है. इस द्रव में थायरॉइड के हार्मोन पाए जाते हैं. इन हार्मोन में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है. थायरॉइड ग्रंथि एंडोक्राइन प्रणाली का हिस्सा है. जो कई अंगों और ऊतकों से मिलकर बनी है. ये ऊतक हार्मोन यानी रासायनिक पदार्थों को पैदा करते हैं, जमा करते हैं और खून में भेजते हैं।
*थायरॉइड हार्मोन कैसे काम करते हैं?*
थायरॉइड हार्मोन पेट में पाचक रस के बनने की गति को बढ़ाते हैं। थायरॉइड हार्मोन, ऊतकों के बढ़ने में मदद करते हैं। शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए ऊर्जा पैदा करते हैं. वे खून से खराब कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा को निकालने में लीवर की मदद करते हैं। खराब कोलेस्ट्रॉल पित्त से मिलकर मल-मूत्र के रूप में बाहर निकलता है।
थायरॉइड हार्मोन के कम और ज्यादा होने से क्या होता है।
थायरॉइड हार्मोन की कमी से शरीर में खराब कोलेस्टराल बढ़ता है. जिससे अच्छा कोलेस्टराल घटता है।
थायरॉइड हार्मोन अधिक होने से दस्त और कम होने से कब्ज़ हो सकता है. क्योंकि ये हार्मोन मेटाबोलिज़म को नियंत्रण में रखता है।
*थायरॉइड होने पर शरीर में क्या लक्षण दिखते हैं?*
दिनभर थकान होती है।
रातभर नींद लेने के बाद भी सुबह थका हुआ महसूस करते हैं।
डिप्रेशन भी हार्मोंस के कम स्तर का संकेत हो सकता है। क्योंकि थायरॉइड हार्मोंस मस्तिष्क के सेरोटोनिन तत्व से जुड़ा होता है। सेरोटोनिन एक बायोकेमिकल है, जोअच्छा महसूस कराता है।
बहुत अधिक चिंतित रहना।
अधिक भूख लगती है, लेकिन वज़न बढ़ने की बजाय कम होता है।
थायरॉइड हार्मोंस के कम होने पर सेक्स में दिलचस्पी कम होने लगती है. लेकिन इसका सीधा संबंध थायरॉइड से न होकर थकान और ऊर्जा की कमी से होता है।
कब्ज़ की शिकायत।
महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता।
थायरॉइड की कमी से पीरियड्स के बीच का अंतर बढ़ता है।
थायरॉइड की अधिकता से पीरियड्स जल्दी-जल्दी होते हैं।
हाथ-पैरों में दर्द और सुन्न रहना।
हाई ब्लडप्रेशर की परेशानी।
बहुत ठंड या गर्मी लगना।
थायरॉइड में सूजन की वजह से आवाज़ में बदलाव आता है.
सिर, आईब्रो व अन्य हिस्सों के बालों में कमी होना।
थायरॉइड की कमी से बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से दिल की परेशानी भी होती है।
*किन वजहों से होता है थायरॉइड*
आयोडीन शरीर के लिए बहुत जरूरी है. शरीर में 80 प्रतिशत आयोडीन, थायरॉइड में पाया जाता है. खाने में आयोडीन की कमी होने से थायरॉइड ग्रंथि सूज जाती है जिसे घेंघा (गॉयटर) कहते हैं।
आयोडीन सभी के लिए बेहद ज़रूरी है. चाहे वो बड़ा हो या बच्चा. जानें, छोटे बच्चों में क्या करता है आयोडीन।
छोटे बच्चों में आयोडीन की कमी से हार्मोन का निर्माण धीमा पड़ जाता है. इससे उनके शारीरिक, मानसिक और जननांगों का ठीक से विकास नहीं हो पाता. इस बीमारी को क्रीटीनिज़्म कहते हैं।
दवाइयों के साइड इफेक्ट से भी थायरॉइड हो जाता है।
सोया प्रोटीन, कैप्सूल, और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों को जरूरत से ज्यादा लेने से भी थायरॉइड हो जाता है।
त्वचा की समस्या से छुटकारा पाने के लिए रेडिएशन थेरेपी भी इसके होने की वजहों में से एक है। रेडिएशन थेरेपी की वजह से टॉन्सिल्स या फिर थाइमस ग्रंथि में परेशानी हो सकती है, जिस वजह से थायरॉइड हो सकता है।
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल परिवर्तन से भी थायरॉइड होता है।
तनाव का असर दिमाग के साथ-साथ थायरॉइड ग्रंथि पर भी पड़ता है, जिस वजह से हॉर्मोन स्राव बढ़ने से थायरॉइड होता है।
यह बीमारी जेनेटिक भी है, यानी माता-पिता को थायरॉइड हो तो बच्चो को होने की संभावना भी रहती है।
*थायरॉइड दो तरह का होता है*
*हाइपर थायरॉइड- वजन कम होता है।*
*हाइपो थायरॉइड- वजन बढ़ता है।*
*हाइपर थायरॉइड*
इसमें थायरॉइड ग्रंथि में अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोन बनता है. जिस वजह से शरीर, उर्जा का इस्तेमाल ज्यादा करता है. हाइपर थायरॉइड वाले पेशेंट का वज़न घटता है।
*हाइपर थायराइड के लक्षण*
कमजोरी महसूस होना।
बाल बहुत अधिक झड़ना।
त्वचा से सम्बंधित रोग होना।
अचानक से शरीर का कांपना।
दिल की धडकन तेज होना.
वजन तेजी से कम होना।
पसीना ज्यादा या बिलकुल भी न आना।
पीरियड्स कम आना।
नींद न आना।
*हाइपर थायरॉइड मरीज क्या खाएं?*
*ब्रोकली खाएं*
इसमें गॉइट्रोजेन्स और आइसोथायोसाइनेट्स तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के निर्माण पर अंकुश लगाते हैं।
*सोया प्रोडक्ट्स लें*
ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं. प्रोटीन थायरॉइड हार्मोंस को दूसरे बॉडी टिश्यूज़ में ट्रांसपोर्ट कर देते हैं।
*ओमेगा 3 फैटी एसिड्स लें*
इससे हार्मोंस में संतुलन रहेगा. इसके लिए फ्लैक्स सीड्स, अखरोट ले सकते हैं।
*बेरीज़ लें*
ये थायरॉइड ग्लांड्स को हेल्दी रखती हैं. बेरीज़ में ब्लू बेरीज़, स्ट्रॉबेरीज़, ब्लैक बेरीज़ और चेरी भी शामिल है।
*आंवला ले*
ये थायरॉइड को कंट्रोल करता है।
*हाइपो थायरॉइड*
हाइपो थायरॉइड पेशेंट की थायरॉइड ग्रंथि में हार्मोंस की मात्रा तेजी से कम होती है. इस दौरान मरीज की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है. वजन तेजी से बढ़ता है।
*हाइपो थायराइड के लक्षण*
वजन तेजी से बढ़ना।
हर वक्त डिप्रेशन में रहना।
चिड़चिड़ापन और ज्यादा गुस्सा आना।
कब्ज और एसिडिटी की शिकायत.
शरीर और चेहरे का फूलना।
त्वचा में रुखापन।
अनियमित पीरियड्स होना।
बिना कुछ काम किए थकान लगना महसूस होना।
*हाइपो थायरॉइड मरीज क्या खाएं?*
हाइपो थायराइ मरीज में कैल्शियम और विटामिन-b की कमी हो जाती है. जिससे थकान रहती है। इसके लिए वे अदरक खाने में ज़रूर शामिल करें।
साबुत अनाज, जैसे-ज्वार, बाजरा लें. साबुत अनाज में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होता है।
फल, सब्ज़ियां लें. इनमें एंटीआक्सीडेंट होते हैं. जो थायरॉइड को बढ़ने नहीं देता।
*अदरक में कैल्शियम और विटामिन-b कॉम्प्लेक्स होता है।*
इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बायोटिन थायराइड ग्रंथि को ठीक से काम करने में मददगार है।
इसमें मैग्नशियम, जिंक, आयरन और पोटेशियम होता है, जो थायराइड ग्रंथि में हार्मोंस की मात्रा को कम होने से रोकता है।
*अदरक का सेवन कैसे करें?*
*एक छोटा चम्मच अदरक का जूस लें।*
अदरक का काढ़ा बना कर लें. काढ़ा बनाने के लिए आधे गिलास पानी में दो टुकड़े अदरक, 4-5 पत्तिया तुलसी और एक tea स्पून शहद डाल कर पका लें।
*विटामिन-b के लिए*
*दूध लें*
दूध में कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते है।
*दही लें*
लेकिन बिना फ्लेवर वाला. ये भी विटामिन-b की कमी को पूरा करता है।
*थायरॉइड का इलाज*
थायरॉइड ठीक से काम कर रहा है या नहीं, ये पता लगाने के लिए खून में TSH और थायरॉइड हार्मोन की जांच की जाती है. थायरॉइड को एक्युप्रेशर के ज़रिए भी ठीक किया जा सकता है. एक्युप्रेशर में पैराथायरॉइड और थायरॉइड के जो बिंदू होते हैं वे पैरों और हाथों के अंगूठे के नीचे और थोड़े उठे हुए भाग में मौजूद रहते हैं. इन बिंदुओं (प्वॉइंट्स) को बांई से दांई ओर प्रेशर देना यानी दबाना चाहिए. साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हाइपो थायरॉइड का पता टी3, टी4 और टीएसएच हॉर्मोन की जांच से चलता है. ऐसे मरीज कुछ दिनों तक दवा लेने के बाद पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. कई बार लंबे वक्त तक भी दवा लेनी पड़ती l
*डायग्नोस्टिक चेन एसआरएल ने जून 2017 में एक रिपोर्ट में कहा था कि 32 फीसदी भारतीय थायरॉइड की वजह से होने वाली बीमारियों के शिकार हैं।*
*थायरॉइड मरीज ऐसा रखें डेली रूटीन*
सुबह जल्दी उठें और सुबह की दवा खाने के दस मिनट बाद 2 गिलास गुनगुना पानी पिएं!
थायरॉइड के रोगी को अपनी दिनचर्या में योग या किसी भी प्रकार के व्यायाम को जरूर शामिल करना चाहिए. आप सुबह-सुबह दौड़ लगाने से लेकर योग करने और
जिम जाने तक कोई भी व्यायाम कर सकते हैं।
दवा खाने के बाद एक घंटे तक चाय-कॉफी, नाश्ता कुछ भी नहीं खाएं।
सुबह नाश्ते के साथ लौकी का जूस पिएं. या फिर घर में ही थोड़े से गेहूं उगाएं. रोज सुबह उठकर गेहूं के ज्वारों का जूस भी लाभदायक रहता है. इसके अलावा बाज़ार
से अच्छे किस्म का एलोवेरा जूस लाकर पी सकते हैं, जिसमें फाइबर ज्यादा हो।
अखरोट और बादाम में सेलेनियम नाम का एक तत्व मिलता है, जो थॉयराइड के इलाज में फायदेमंद है.
अखरोट और बादाम खाने से थायरॉइड के कारण गले में होने वाली सूजन कम हो जाती है.
यह हाइपोथाइराइड में ज्यादा फायदेमंद होता है. इसलिए रात में अखरोट और बादाम को भिगो लें और सुबह नाश्ते में खूब चबा-चबाकर इसे खाएं।
रोज दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर गर्म करें. इससे थायरॉइड को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. अगर दूध में हल्दी मिलाकर पीना पसंद नहीं है तो आप हल्दी को भूनकर, पानी में गर्म करके या किसी और तरीके से उसका सेवन कर सकते हैं।
भोजन समय पर करें. बिलकुल भूखे न रहें. थायरॉइड के रोगी को यह सलाह दी जाती है कि वह समय पर भोजन कर ले. भूखे पेट रहने पर थायरॉइड ग्रंथि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है!
*थायरॉइड हॉर्मोन को नियंत्रित करने में काली मिर्च मददगार है।*
अपने भोजन में वसा और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बिलकुल कम कर दें और विटामिन ए की मात्रा बढ़ा दें. खाने-पीने में हरी सब्जियां और मिनरल्स वाली चीज़ें ज्यादा लें. गाजर, अंडे और पीले रंग की सब्जियां खाएं, जिनमें विटामिन ए ज्यादा होता है!
प्रोबायोटिक पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें. दही औरसेब का सिरका जैसी चीज़ें खाएं, जो शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में करते हैं।
अपने शरीर में आयोडीन का लेवल चेक करते रहें क्योंकि मेटाबॉलिज्म के सही तरीके से काम करने के लिए आयोडीन बहुत जरूरी होता है. शरीर में आयोडीन की कमी न होने दें. समय-समय पर डॉक्टर से भी चेकअप करवाएं।





