Wednesday, August 5, 2026

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बहराइच : राजकीय पशु चिकित्सालय हुआ बीमार, बिना डॉक्टर के संचालित होने का आरोप

रिपोर्ट – प्रभारी आर के निराला

प्रदेश संवाददाता पत्रकार अतुल कुमार तिवारी 

नवाबगंज, बहराइच

नवाबगंज स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

 

न्यू मीडिया हाउस के पत्रकारों द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण और स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए गए।

 

 

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल में नियमित रूप से डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते, जिसके चलते पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 

बताया गया कि कई बार पशुओं के उपचार की जिम्मेदारी कंपाउंडर और अन्य कर्मचारियों के भरोसे चलती दिखाई देती है।

 

इससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले पशुपालकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।

 

ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में व्याप्त अव्यवस्थाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

 

उनका कहना है कि सरकार द्वारा पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं।

 

इस मामले को बेनकाब भ्रष्टाचार हिंदी राष्ट्रीय समाचार पत्र ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

 

वहीं भारतीय पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (भारत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर. के. निराला ने संबंधित उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

 

 

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में नियमित चिकित्सक की तैनाती सुनिश्चित की जाए और पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

 

 

 

 

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बहराइच : राजकीय पशु चिकित्सालय हुआ बीमार, बिना डॉक्टर के संचालित होने का आरोप

रिपोर्ट – प्रभारी आर के निराला

प्रदेश संवाददाता पत्रकार अतुल कुमार तिवारी 

नवाबगंज, बहराइच

नवाबगंज स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

 

न्यू मीडिया हाउस के पत्रकारों द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण और स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए गए।

 

 

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल में नियमित रूप से डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते, जिसके चलते पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 

बताया गया कि कई बार पशुओं के उपचार की जिम्मेदारी कंपाउंडर और अन्य कर्मचारियों के भरोसे चलती दिखाई देती है।

 

इससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले पशुपालकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।

 

ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में व्याप्त अव्यवस्थाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

 

उनका कहना है कि सरकार द्वारा पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं।

 

इस मामले को बेनकाब भ्रष्टाचार हिंदी राष्ट्रीय समाचार पत्र ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

 

वहीं भारतीय पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (भारत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर. के. निराला ने संबंधित उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

 

 

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में नियमित चिकित्सक की तैनाती सुनिश्चित की जाए और पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

 

 

 

 

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