Wednesday, August 5, 2026

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पूर्वांचल की कलाओं को मिला नया सांस्कृतिक मंच कलाकारों, विद्यार्थियों और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए खुलेगा विमला रामकृष्ण बजाज एम्फीथिएटर

बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज देवरिया

 *देवरिया* पूर्वांचल की सांस्कृतिक गतिविधियों को नया आयाम देने के उद्देश्य से तैयार विमला रामकृष्ण बजाज एम्फीथिएटर का उद्घाटन शनिवार को बरपार स्थित जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल के परिसर में हुआ। करीब 300 वर्ष पुराने बरगद वृक्ष की छांव में बने इस खुले रंगमंच को क्षेत्र के कलाकारों, विद्यार्थियों और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए साझा मंच के रूप में विकसित किया गया है।

उद्घाटन अवसर पर आयोजित प्रेसवार्ता में जागृति के अध्यक्ष शरत बंसल ने कहा कि एम्फीथिएटर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संरचना है। 465 वर्ग फुट में निर्मित एम्फीथिएटर परिसर करीब 300 वर्ष पुराने बरगद वृक्ष के निकट कमल कुण्ड पर विकसित किया गया है, जिसके ऊपर पिलर के सहारे मंच का निर्माण किया गया है। मंच के सामने लगभग 500 लोगों के बैठने की क्षमता वाली सीढ़ीनुमा दर्शक दीर्घा बनाई गई है। सायंकाल प्रकाश व्यवस्था और बरगद की लटकती जटाएं पूरे परिसर को अलग पहचान देती हैं। भविष्य में इस मंच का उपयोग लोकगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं को भी यहां प्रस्तुति और अभ्यास का अवसर मिलेगा। सुबह के समय योग और ध्यान जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकेंगे। साथ ही सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने वाले युवाओं और इन्फ्लुएंसर्स के लिए भी यह मंच आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

जागृति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध रही है। लोकगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय संगीत और रंगमंच की मजबूत परंपरा यहां की पहचान है। ऐसे में इस एम्फीथिएटर को केवल एक मंच नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद और रचनात्मक अभिव्यक्ति के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देवरिया समेत आसपास के जिलों में इस प्रकार के खुले सांस्कृतिक मंच नहीं हैं। ऐसे में पूर्वांचल के कलाकारों, विशेषकर युवा प्रतिभाओं को अपनी कला के प्रदर्शन और अभ्यास के लिए एक स्थायी स्थान उपलब्ध हो सकेगा।

बजाज बिऑन्ड के चीफ सीएसआर प्रोजेक्ट्स एवं प्रिंसिपल ऑफिसर श्याम मनियार ने बताया कि किसी भी समाज का विकास केवल आर्थिक प्रगति से नहीं मापा जा सकता। संस्कृति, कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति समाज की पहचान को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि बजाज बिऑन्ड देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, ग्रामीण विकास और सामुदायिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। पूर्वांचल में इस पहल को सहयोग देने का उद्देश्य क्षेत्र के कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक स्थायी मंच उपलब्ध कराना है।

*क्या है खास*                                                        खुले आसमान के नीचे बने इस एम्फीथिएटर में करीब 500 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। करीब 300 वर्ष पुराने बरगद वृक्ष, तालाब और रंगीन प्रकाश व्यवस्था का संयोजन इसे अलग पहचान देता है। पूर्वांचल में इस प्रकार के खुले सांस्कृतिक मंच नहीं हैं, ऐसे में इसे क्षेत्र की लोक और सांस्कृतिक गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

हेमन्त कुशवाहा (सह मंण्डल प्रभारी)

International

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पूर्वांचल की कलाओं को मिला नया सांस्कृतिक मंच कलाकारों, विद्यार्थियों और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए खुलेगा विमला रामकृष्ण बजाज एम्फीथिएटर

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 *देवरिया* पूर्वांचल की सांस्कृतिक गतिविधियों को नया आयाम देने के उद्देश्य से तैयार विमला रामकृष्ण बजाज एम्फीथिएटर का उद्घाटन शनिवार को बरपार स्थित जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल के परिसर में हुआ। करीब 300 वर्ष पुराने बरगद वृक्ष की छांव में बने इस खुले रंगमंच को क्षेत्र के कलाकारों, विद्यार्थियों और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए साझा मंच के रूप में विकसित किया गया है।

उद्घाटन अवसर पर आयोजित प्रेसवार्ता में जागृति के अध्यक्ष शरत बंसल ने कहा कि एम्फीथिएटर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संरचना है। 465 वर्ग फुट में निर्मित एम्फीथिएटर परिसर करीब 300 वर्ष पुराने बरगद वृक्ष के निकट कमल कुण्ड पर विकसित किया गया है, जिसके ऊपर पिलर के सहारे मंच का निर्माण किया गया है। मंच के सामने लगभग 500 लोगों के बैठने की क्षमता वाली सीढ़ीनुमा दर्शक दीर्घा बनाई गई है। सायंकाल प्रकाश व्यवस्था और बरगद की लटकती जटाएं पूरे परिसर को अलग पहचान देती हैं। भविष्य में इस मंच का उपयोग लोकगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं को भी यहां प्रस्तुति और अभ्यास का अवसर मिलेगा। सुबह के समय योग और ध्यान जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकेंगे। साथ ही सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने वाले युवाओं और इन्फ्लुएंसर्स के लिए भी यह मंच आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

जागृति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध रही है। लोकगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय संगीत और रंगमंच की मजबूत परंपरा यहां की पहचान है। ऐसे में इस एम्फीथिएटर को केवल एक मंच नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद और रचनात्मक अभिव्यक्ति के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देवरिया समेत आसपास के जिलों में इस प्रकार के खुले सांस्कृतिक मंच नहीं हैं। ऐसे में पूर्वांचल के कलाकारों, विशेषकर युवा प्रतिभाओं को अपनी कला के प्रदर्शन और अभ्यास के लिए एक स्थायी स्थान उपलब्ध हो सकेगा।

बजाज बिऑन्ड के चीफ सीएसआर प्रोजेक्ट्स एवं प्रिंसिपल ऑफिसर श्याम मनियार ने बताया कि किसी भी समाज का विकास केवल आर्थिक प्रगति से नहीं मापा जा सकता। संस्कृति, कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति समाज की पहचान को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि बजाज बिऑन्ड देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, ग्रामीण विकास और सामुदायिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। पूर्वांचल में इस पहल को सहयोग देने का उद्देश्य क्षेत्र के कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक स्थायी मंच उपलब्ध कराना है।

*क्या है खास*                                                        खुले आसमान के नीचे बने इस एम्फीथिएटर में करीब 500 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। करीब 300 वर्ष पुराने बरगद वृक्ष, तालाब और रंगीन प्रकाश व्यवस्था का संयोजन इसे अलग पहचान देता है। पूर्वांचल में इस प्रकार के खुले सांस्कृतिक मंच नहीं हैं, ऐसे में इसे क्षेत्र की लोक और सांस्कृतिक गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

हेमन्त कुशवाहा (सह मंण्डल प्रभारी)

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