Saturday, February 21, 2026

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नव वर्ष पर निरंकारी सन्त समागम में हजारों निरंकारी सन्त महात्मा शामिल हुएKushinagar

हेमन्त कुशवाहा
बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज

*कुशीनगर* कसया में नव वर्ष पर आयोजित निरंकारी सन्त समागम मनाया गया। इस निरंकारी सन्त समागम की अध्यक्षता संत निरंकारी मिशन के केन्द्रीय प्रचारक महात्मा बख्शीराम जी (बैंगलोर) ने किया। प्रचारक महात्मा ने अपने विचार में कहा की इस निरंकार को परमात्मा को जो जान लेगा उसकि नईया भव से पार हो जाएगी,इस परमात्मा को जानने के लिए सबसे पहले हमें ज्ञान की जरुरत है जो आज हमारे समय के सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हमें दे रही है।उन्होंने बताया कि मानव जन्म ही एक ऐसा जन्म है जिसमे इन्सान को हर चीज की समझ होती है,और केवल इसी जन्म में वो परमात्मा को प्राप्त कर सकता है,उसकी इबादत कर सकता है। सारा संसार इस निरंकार परमात्मा के ही अन्दर समाया हुआ है,सब इस निरंकार परमात्मा में ही जन्म ले रहें हैं और शरीर का त्याग भी इसी परमात्मा में कर देते हैं,पर जब इस दातार को जानने समझने और देखने की बारी आती है तो संसार के माया में खो जाते है, सन्त निरंकारी मिशन के सत्गुरु कई वर्षों से इस निरंकार को दिखा रहें हैं,की आवो दुनिया के लोगों जिनको परमात्मा को देखना है जानना है और इसी परमात्मा में एक हो जाना है तो इस दातार को देख लो।

कुशीनगर जोन के जोनल इंचार्ज महात्मा कमलेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि “नदिया एक घाट बहु तेरे।
जिस प्रकार नदी तो एक ही रहती है एक परिस्थिति के अनुसार जगह जगह पर कई नाम घाट बना कर उसको कई नाम से पुकारा जाता है,पर उसका मूल तो एक ही है,उसका असली नाम तो एक ही है।इसी तरह परमात्मा भी एक ही है बस उसे अलग अलग लोग अलग अलग नमो से पुकारते हैं,पर जब इस रहबर इस निराकर का ज्ञान मिल जाता है तो अब भ्रम दूर हो जाते हैं तब अब की भाव स्थिति महात्मा की हो जाती है,तब वो सब में इसी निरंकार को देखता है और सबके भले की कामना करने लगता है।

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नव वर्ष पर निरंकारी सन्त समागम में हजारों निरंकारी सन्त महात्मा शामिल हुएKushinagar

हेमन्त कुशवाहा
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*कुशीनगर* कसया में नव वर्ष पर आयोजित निरंकारी सन्त समागम मनाया गया। इस निरंकारी सन्त समागम की अध्यक्षता संत निरंकारी मिशन के केन्द्रीय प्रचारक महात्मा बख्शीराम जी (बैंगलोर) ने किया। प्रचारक महात्मा ने अपने विचार में कहा की इस निरंकार को परमात्मा को जो जान लेगा उसकि नईया भव से पार हो जाएगी,इस परमात्मा को जानने के लिए सबसे पहले हमें ज्ञान की जरुरत है जो आज हमारे समय के सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हमें दे रही है।उन्होंने बताया कि मानव जन्म ही एक ऐसा जन्म है जिसमे इन्सान को हर चीज की समझ होती है,और केवल इसी जन्म में वो परमात्मा को प्राप्त कर सकता है,उसकी इबादत कर सकता है। सारा संसार इस निरंकार परमात्मा के ही अन्दर समाया हुआ है,सब इस निरंकार परमात्मा में ही जन्म ले रहें हैं और शरीर का त्याग भी इसी परमात्मा में कर देते हैं,पर जब इस दातार को जानने समझने और देखने की बारी आती है तो संसार के माया में खो जाते है, सन्त निरंकारी मिशन के सत्गुरु कई वर्षों से इस निरंकार को दिखा रहें हैं,की आवो दुनिया के लोगों जिनको परमात्मा को देखना है जानना है और इसी परमात्मा में एक हो जाना है तो इस दातार को देख लो।

कुशीनगर जोन के जोनल इंचार्ज महात्मा कमलेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि “नदिया एक घाट बहु तेरे।
जिस प्रकार नदी तो एक ही रहती है एक परिस्थिति के अनुसार जगह जगह पर कई नाम घाट बना कर उसको कई नाम से पुकारा जाता है,पर उसका मूल तो एक ही है,उसका असली नाम तो एक ही है।इसी तरह परमात्मा भी एक ही है बस उसे अलग अलग लोग अलग अलग नमो से पुकारते हैं,पर जब इस रहबर इस निराकर का ज्ञान मिल जाता है तो अब भ्रम दूर हो जाते हैं तब अब की भाव स्थिति महात्मा की हो जाती है,तब वो सब में इसी निरंकार को देखता है और सबके भले की कामना करने लगता है।

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