Saturday, February 21, 2026

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जौनपुर : समाजसेवी अतुल तिवारी ने आम आदमी पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा, UGC के ‘भेदभावपूर्ण’ नियमों के खिलाफ खोला मोर्चा – पूर्व जिला मीडिया प्रभारी, अतुल तिवारी

सवर्ण समाज के हितों के लिए पद त्यागने को तैयार हुए समाजसेवी अतुल कुमार तिवारी

​जौनपुर |

​आम आदमी पार्टी के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी और समाजसेवी अतुल कुमार तिवारी ने यूजीसी (UGC) के वर्तमान नियमों को ‘काली नीति’ बताते हुए इसके खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सवर्ण समाज और छात्रों के न्याय के लिए वह किसी भी राजनीतिक पद या पार्टी की सदस्यता को छोड़ने के लिए तैयार हैं।

​जातिवाद नहीं, ‘छात्रवाद’ की मांग

​अतुल तिवारी ने कहा कि यूजीसी के नियमों में संशोधन अनिवार्य है। उन्होंने मांग की है कि शिक्षा और न्याय के क्षेत्र में जातिगत भेदभाव को समाप्त कर ‘छात्रवाद’ लागू किया जाए, जिससे SC/ST, OBC और General (सामान्य श्रेणी) के सभी छात्रों को बराबरी का हक और न्याय मिल सके।

​अनुशासनहीनता के आरोपों पर दो टूक

​पार्टी द्वारा विरोध प्रदर्शन को अनुशासनहीनता माने जाने पर अतुल तिवारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

​”मैंने पार्टी को पहले ही लिखित में सूचित कर दिया था कि यदि समाज और छात्रों के हक की आवाज उठाना अनुशासनहीनता है, तो मैं ऐसी ‘अनुशासनहीनता’ बार-बार करूँगा। मेरे लिए समाज का सम्मान और न्याय सर्वोपरि है। इसके लिए मैं अपने सभी पदों से इस्तीफा देने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।

​प्रमुख बिंदु और भावी रणनीति:

​निजी संघर्ष: अतुल तिवारी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में वह इस लड़ाई को निजी स्तर पर लड़ेंगे और इसमें पार्टी के बैनर या नाम का उपयोग नहीं करेंगे, ताकि पार्टी की नीतियों में टकराव न हो।

​दोहरा मापदंड: उन्होंने राजनीतिक दलों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब दूसरे समाज या धर्म की बात आती है तो सभी दल एकजुट होते हैं, लेकिन सवर्ण समाज के अधिकारों की बात आने पर नेता ‘मौन’ धारण कर लेते हैं, अपने ही लोगों को समझने और चुप रहने के लिए कहते हैं यह बहुत ही शर्म की बात है और चिंता का विषय है

​अंतिम संदेश: उन्होंने सवाल उठाया कि जब हम दूसरे समाज, जाति, धर्म के हक अधिकार के लिए प्रदर्शन कर सकते हैं, तो अपने समाज के साथ हो रहे अन्याय पर चुप क्यों रहें?

​अतुल तिवारी ने अंत में दोहराया कि जब तक यूजीसी के इन नियमों में न्यायसंगत संशोधन नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। और आगे से वह एक सामाजिक संगठन अखिल भारतीय हिंदू सेवा दल जिसमें वह पूर्व से ही जुड़े हैं वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के प्रदेश संगठन मंत्री हैं वहां कार्यरत रहेंगे व सामाजिक कार्य करते रहेंगे।

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जौनपुर : समाजसेवी अतुल तिवारी ने आम आदमी पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा, UGC के ‘भेदभावपूर्ण’ नियमों के खिलाफ खोला मोर्चा – पूर्व जिला मीडिया प्रभारी, अतुल तिवारी

सवर्ण समाज के हितों के लिए पद त्यागने को तैयार हुए समाजसेवी अतुल कुमार तिवारी

​जौनपुर |

​आम आदमी पार्टी के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी और समाजसेवी अतुल कुमार तिवारी ने यूजीसी (UGC) के वर्तमान नियमों को ‘काली नीति’ बताते हुए इसके खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सवर्ण समाज और छात्रों के न्याय के लिए वह किसी भी राजनीतिक पद या पार्टी की सदस्यता को छोड़ने के लिए तैयार हैं।

​जातिवाद नहीं, ‘छात्रवाद’ की मांग

​अतुल तिवारी ने कहा कि यूजीसी के नियमों में संशोधन अनिवार्य है। उन्होंने मांग की है कि शिक्षा और न्याय के क्षेत्र में जातिगत भेदभाव को समाप्त कर ‘छात्रवाद’ लागू किया जाए, जिससे SC/ST, OBC और General (सामान्य श्रेणी) के सभी छात्रों को बराबरी का हक और न्याय मिल सके।

​अनुशासनहीनता के आरोपों पर दो टूक

​पार्टी द्वारा विरोध प्रदर्शन को अनुशासनहीनता माने जाने पर अतुल तिवारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

​”मैंने पार्टी को पहले ही लिखित में सूचित कर दिया था कि यदि समाज और छात्रों के हक की आवाज उठाना अनुशासनहीनता है, तो मैं ऐसी ‘अनुशासनहीनता’ बार-बार करूँगा। मेरे लिए समाज का सम्मान और न्याय सर्वोपरि है। इसके लिए मैं अपने सभी पदों से इस्तीफा देने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।

​प्रमुख बिंदु और भावी रणनीति:

​निजी संघर्ष: अतुल तिवारी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में वह इस लड़ाई को निजी स्तर पर लड़ेंगे और इसमें पार्टी के बैनर या नाम का उपयोग नहीं करेंगे, ताकि पार्टी की नीतियों में टकराव न हो।

​दोहरा मापदंड: उन्होंने राजनीतिक दलों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब दूसरे समाज या धर्म की बात आती है तो सभी दल एकजुट होते हैं, लेकिन सवर्ण समाज के अधिकारों की बात आने पर नेता ‘मौन’ धारण कर लेते हैं, अपने ही लोगों को समझने और चुप रहने के लिए कहते हैं यह बहुत ही शर्म की बात है और चिंता का विषय है

​अंतिम संदेश: उन्होंने सवाल उठाया कि जब हम दूसरे समाज, जाति, धर्म के हक अधिकार के लिए प्रदर्शन कर सकते हैं, तो अपने समाज के साथ हो रहे अन्याय पर चुप क्यों रहें?

​अतुल तिवारी ने अंत में दोहराया कि जब तक यूजीसी के इन नियमों में न्यायसंगत संशोधन नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। और आगे से वह एक सामाजिक संगठन अखिल भारतीय हिंदू सेवा दल जिसमें वह पूर्व से ही जुड़े हैं वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के प्रदेश संगठन मंत्री हैं वहां कार्यरत रहेंगे व सामाजिक कार्य करते रहेंगे।

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