Tuesday, August 4, 2026

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रमाकांत पांडे ब्यूरो चीफ बेनकाब भ्रष्टाचार अंबेडकर नगर *गन्ने की मानसून काल में लगने वाले रोगों व कीटों के नियन्त्रण हेतु सुझाव एवं उपाय*

रमाकांत पांडे ब्यूरो चीफ
बेनकाब भ्रष्टाचार
अंबेडकर नगर
*गन्ने की मानसून काल में लगने वाले रोगों व कीटों के नियन्त्रण हेतु सुझाव एवं उपाय*
अंबेडकरनगर l जिला गन्ना अधिकारी अंबेडकर नगर में अवगत कराया की वर्तमान में वर्षा अधिक होने व बीच-बीच में धूप होने के कारण प्रदेश में गन्नें के पौधे व पेड़ी फसल में रोगों व कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है।जैसे चोटी बेधक इस कीट की तृतीय पीढ़ी चल रही है जो गन्ने की फसल के लिए बहुत हानिकारक है इसके नियंत्रण के लिए पत्तियों की निचली सतह पर चोटी बेधक के नारंगी रंग के अण्ड समूह दिखाई देने पर उसे शीघ्र नष्ट कर दे एवं प्रर्याप्त नमी अवस्था में क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल 0.4 प्रतिशत 9 किग्रा अथवा क्लोरेन्द्रनिलिप्रोल 0.5 प्रतिशत थायोगथॉक्सम 1.0 प्रतिशत प्रति एकड की दर से प्रयोग करें।जड़ वेधक यह कीट सूड़ी का रंग सेफद पीठ पर कोई धारी नहीं होती तथा सिर का रंग गहरा भूरा होता है इसके नियंत्रण के लिए गन्नें की जड़ के पास बेवेरिया बैसियाना अथवा मेटाराइजियम एनीसोपली की 2.0 कि.ग्रा प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद में मिलाकर गुडाई करें तथा प्रर्याप्त नमी की अवस्था में फिप्रोनिल 0.3 जी 8 कि.ग्राम अथवा कलोरपाइरीफॉस 20 प्रतिशत, ई.सी 2 लीटर अथवा क्लोरपाइरीफॉस 50 प्रतिशत ई.सी 1 लीटर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल 200 मिली, अथवा बाहफेन्थिन 10 ई.सी का 400 मिली प्रति एकड़ की दर से 750 लीटर पानी के साथ मिलाकर ड्रेन्चिग करने के उपरान्त सिचाई करें।तना बेधक तथा पोरी बेधक का नियंत्रण इस कीट का प्रभाव मुख्यतः जुलाई माह से सितम्बर माह के मध्य गन्ने की बढ़वार के समय होता है तथा संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें एवं जल निकासी का उचित व्यवस्था करें, माह अगस्त एवं सितम्बर में गन्नें की सूखी पत्तियो को पत्र कंचुक सहित निकालें। मानसून काल में प्रति एकड़ की दर से प्रोपोनाफॉस 10 प्रतिशत+साइपरमेंथिन 4 प्रतिशत ई.सी अथवा क्लोनालफॉस 25 प्रतिशत ई.सी का 400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें गुलाबी विकट (मिलीबग)मादा कीट गुलाबी रंग की तथा गोल या चपटे आकार की होती है ये गन्ने की गाँठ पर या शीर्ष की पत्तियों पर पाये जाते है तथा तने से रस चूसते है जुलाई-अगस्त की महीनों में इसका आपतन अधिक पाया जाता है। इसके नियंत्रण के लिए गन्ने के लीफशीथ को हटाने के बाद प्रति हेक्टेयर की दर से इमिडाक्लोरिड 17.8 प्रतिशत एस.एल की 100 मिली अथवा डाइमेथोयेट 30 प्रतिशत ई.सी की दर 500 मिली. मात्राप्रति एकड की दर से 250 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।माइट (मकरी)इस कीट का प्रकोप गन्ने की पत्तियों तथा लीफशीथ पर दिखाई देता है। इसके नियंत्रण के लिए सल्फर 400 ग्राम + चुना 12 ग्राम को 250 लीटर पानी मे प्रति एकड़ दर से घोल बनाकर पर्णीय छिड़काव करना चाहिए एवंइनिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस.एल दर 100 मिली. को 250 लीटर पानी मे प्रति एकड़ दर से घोलकर छिडकाव करें।

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रमाकांत पांडे ब्यूरो चीफ बेनकाब भ्रष्टाचार अंबेडकर नगर *गन्ने की मानसून काल में लगने वाले रोगों व कीटों के नियन्त्रण हेतु सुझाव एवं उपाय*

रमाकांत पांडे ब्यूरो चीफ
बेनकाब भ्रष्टाचार
अंबेडकर नगर
*गन्ने की मानसून काल में लगने वाले रोगों व कीटों के नियन्त्रण हेतु सुझाव एवं उपाय*
अंबेडकरनगर l जिला गन्ना अधिकारी अंबेडकर नगर में अवगत कराया की वर्तमान में वर्षा अधिक होने व बीच-बीच में धूप होने के कारण प्रदेश में गन्नें के पौधे व पेड़ी फसल में रोगों व कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है।जैसे चोटी बेधक इस कीट की तृतीय पीढ़ी चल रही है जो गन्ने की फसल के लिए बहुत हानिकारक है इसके नियंत्रण के लिए पत्तियों की निचली सतह पर चोटी बेधक के नारंगी रंग के अण्ड समूह दिखाई देने पर उसे शीघ्र नष्ट कर दे एवं प्रर्याप्त नमी अवस्था में क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल 0.4 प्रतिशत 9 किग्रा अथवा क्लोरेन्द्रनिलिप्रोल 0.5 प्रतिशत थायोगथॉक्सम 1.0 प्रतिशत प्रति एकड की दर से प्रयोग करें।जड़ वेधक यह कीट सूड़ी का रंग सेफद पीठ पर कोई धारी नहीं होती तथा सिर का रंग गहरा भूरा होता है इसके नियंत्रण के लिए गन्नें की जड़ के पास बेवेरिया बैसियाना अथवा मेटाराइजियम एनीसोपली की 2.0 कि.ग्रा प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद में मिलाकर गुडाई करें तथा प्रर्याप्त नमी की अवस्था में फिप्रोनिल 0.3 जी 8 कि.ग्राम अथवा कलोरपाइरीफॉस 20 प्रतिशत, ई.सी 2 लीटर अथवा क्लोरपाइरीफॉस 50 प्रतिशत ई.सी 1 लीटर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल 200 मिली, अथवा बाहफेन्थिन 10 ई.सी का 400 मिली प्रति एकड़ की दर से 750 लीटर पानी के साथ मिलाकर ड्रेन्चिग करने के उपरान्त सिचाई करें।तना बेधक तथा पोरी बेधक का नियंत्रण इस कीट का प्रभाव मुख्यतः जुलाई माह से सितम्बर माह के मध्य गन्ने की बढ़वार के समय होता है तथा संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें एवं जल निकासी का उचित व्यवस्था करें, माह अगस्त एवं सितम्बर में गन्नें की सूखी पत्तियो को पत्र कंचुक सहित निकालें। मानसून काल में प्रति एकड़ की दर से प्रोपोनाफॉस 10 प्रतिशत+साइपरमेंथिन 4 प्रतिशत ई.सी अथवा क्लोनालफॉस 25 प्रतिशत ई.सी का 400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें गुलाबी विकट (मिलीबग)मादा कीट गुलाबी रंग की तथा गोल या चपटे आकार की होती है ये गन्ने की गाँठ पर या शीर्ष की पत्तियों पर पाये जाते है तथा तने से रस चूसते है जुलाई-अगस्त की महीनों में इसका आपतन अधिक पाया जाता है। इसके नियंत्रण के लिए गन्ने के लीफशीथ को हटाने के बाद प्रति हेक्टेयर की दर से इमिडाक्लोरिड 17.8 प्रतिशत एस.एल की 100 मिली अथवा डाइमेथोयेट 30 प्रतिशत ई.सी की दर 500 मिली. मात्राप्रति एकड की दर से 250 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।माइट (मकरी)इस कीट का प्रकोप गन्ने की पत्तियों तथा लीफशीथ पर दिखाई देता है। इसके नियंत्रण के लिए सल्फर 400 ग्राम + चुना 12 ग्राम को 250 लीटर पानी मे प्रति एकड़ दर से घोल बनाकर पर्णीय छिड़काव करना चाहिए एवंइनिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस.एल दर 100 मिली. को 250 लीटर पानी मे प्रति एकड़ दर से घोलकर छिडकाव करें।

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