Saturday, February 21, 2026

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पकड़ी बजार के वार्षिक निरंकारी सन्त समागम में हजारों निरंकारी सन्त महात्मा शामिल हुएnirankari

बेनकाब भ्रष्टाचार न्यूज 

nirankari – पकड़ी बजार/देवरिया:- देवरिया जिले के पकड़ी बजार में बाबा परमहंस उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पकड़ी बजार का वार्षिक सन्त निरंकारी सन्त समागम बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। संन्त निरंकारी मिशन एक ऐसा मिशन है जिसका कार्यक्रम हर रोज कहीं न कहीं सत्संग के रुप में मनाया जाता है ।इसी रुप में आज जनपद देवरिया के पकड़ी बजार में निरंकारी संत समागम बड़े ही धुम धाम से मनाया गया जहां बहुत ही दूर दराज के क्षेत्रों से महात्मा सत्संग का आनन्द लेने के लिए आए हुए थे,जैसे की,तरकुलवा,रुद्रपुर,भाटपार रानी तो जिले से गोरखपुर और सटे बिहार के भी महात्मा इस संत समागम में निरंकार प्रभु की गुणगान करते हुए सतगुरु की महिमा गाते हुए खुशियां मनाते दिखे। इस निरंकारी सन्त समागम की अध्यक्षता संत निरंकारी मिशन के ज्ञान प्रचारक महात्मा राम नवल चौधरी बस्ती ने किया।

  • ज्ञान प्रचारक महात्मा चौधरी ने अपने विचार में कहा की इस निरंकार को परमात्मा को जो जान लेगा उसकि नईया भव से पार हो जाएगी,इस परमात्मा को जानने के लिए सबसे पहले हमें ज्ञान की जरुरत है जो आज हमारे समय के सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हमें दे रही है।उन्होंने बताया कि मानव जन्म ही एक ऐसा जन्म है जिसमे इन्सान को हर चीज की समझ होती है,और केवल इसी जन्म में वो परमात्मा को प्राप्त कर सकता है,उसकी इबादत कर सकता है। सारा संसार इस निरंकार परमात्मा के ही अन्दर समाया हुआ है,सब इस निरंकार परमात्मा में ही जन्म ले रहें हैं और शरीर का त्याग भी इसी परमात्मा में कर देते हैं,पर जब इस दातार को जानने समझने और देखने की बारी आती है तो संसार के माया में खो जाते है, सन्त निरंकारी मिशन के सत्गुरु कई वर्षों से इस निरंकार को दिखा रहें हैं,की आवो दुनिया के लोगों जिनको परमात्मा को देखना है जानना है और इसी परमात्मा में एक हो जाना है तो इस दातार को देख लो।सन्त निरंकारी मिशन के बस्ती जिले के ज्ञान प्रचार राम नवल चौधरी ने कहा कि “नदिया एक घाट बहु तेरे।

जिस प्रकार नदी तो एक ही रहती है एक परिस्थिति के अनुसार जगह जगह पर कई नाम घाट बना कर उसको कई नाम से पुकारा जाता है,पर उसका मूल तो एक ही है,उसका असली नाम तो एक ही है।इसी तरह परमात्मा भी एक ही है बस उसे अलग अलग लोग अलग अलग नमो से पुकारते हैं,पर जब इस रहबर इस निराकर का ज्ञान मिल जाता है तो अब भ्रम दूर हो जाते हैं तब अब की भाव स्थिति महात्मा की हो जाती है,तब वो सब में इसी निरंकार को देखता है और सबके भले की कामना करने लगता है।

हेमन्त कुशवाहा (देवरिया)

International

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पकड़ी बजार के वार्षिक निरंकारी सन्त समागम में हजारों निरंकारी सन्त महात्मा शामिल हुएnirankari

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nirankari – पकड़ी बजार/देवरिया:- देवरिया जिले के पकड़ी बजार में बाबा परमहंस उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पकड़ी बजार का वार्षिक सन्त निरंकारी सन्त समागम बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। संन्त निरंकारी मिशन एक ऐसा मिशन है जिसका कार्यक्रम हर रोज कहीं न कहीं सत्संग के रुप में मनाया जाता है ।इसी रुप में आज जनपद देवरिया के पकड़ी बजार में निरंकारी संत समागम बड़े ही धुम धाम से मनाया गया जहां बहुत ही दूर दराज के क्षेत्रों से महात्मा सत्संग का आनन्द लेने के लिए आए हुए थे,जैसे की,तरकुलवा,रुद्रपुर,भाटपार रानी तो जिले से गोरखपुर और सटे बिहार के भी महात्मा इस संत समागम में निरंकार प्रभु की गुणगान करते हुए सतगुरु की महिमा गाते हुए खुशियां मनाते दिखे। इस निरंकारी सन्त समागम की अध्यक्षता संत निरंकारी मिशन के ज्ञान प्रचारक महात्मा राम नवल चौधरी बस्ती ने किया।

  • ज्ञान प्रचारक महात्मा चौधरी ने अपने विचार में कहा की इस निरंकार को परमात्मा को जो जान लेगा उसकि नईया भव से पार हो जाएगी,इस परमात्मा को जानने के लिए सबसे पहले हमें ज्ञान की जरुरत है जो आज हमारे समय के सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हमें दे रही है।उन्होंने बताया कि मानव जन्म ही एक ऐसा जन्म है जिसमे इन्सान को हर चीज की समझ होती है,और केवल इसी जन्म में वो परमात्मा को प्राप्त कर सकता है,उसकी इबादत कर सकता है। सारा संसार इस निरंकार परमात्मा के ही अन्दर समाया हुआ है,सब इस निरंकार परमात्मा में ही जन्म ले रहें हैं और शरीर का त्याग भी इसी परमात्मा में कर देते हैं,पर जब इस दातार को जानने समझने और देखने की बारी आती है तो संसार के माया में खो जाते है, सन्त निरंकारी मिशन के सत्गुरु कई वर्षों से इस निरंकार को दिखा रहें हैं,की आवो दुनिया के लोगों जिनको परमात्मा को देखना है जानना है और इसी परमात्मा में एक हो जाना है तो इस दातार को देख लो।सन्त निरंकारी मिशन के बस्ती जिले के ज्ञान प्रचार राम नवल चौधरी ने कहा कि “नदिया एक घाट बहु तेरे।

जिस प्रकार नदी तो एक ही रहती है एक परिस्थिति के अनुसार जगह जगह पर कई नाम घाट बना कर उसको कई नाम से पुकारा जाता है,पर उसका मूल तो एक ही है,उसका असली नाम तो एक ही है।इसी तरह परमात्मा भी एक ही है बस उसे अलग अलग लोग अलग अलग नमो से पुकारते हैं,पर जब इस रहबर इस निराकर का ज्ञान मिल जाता है तो अब भ्रम दूर हो जाते हैं तब अब की भाव स्थिति महात्मा की हो जाती है,तब वो सब में इसी निरंकार को देखता है और सबके भले की कामना करने लगता है।

हेमन्त कुशवाहा (देवरिया)

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