

*
*ब्यूरो – एस. के मित्रा (बेनकाब भ्रष्टाचार ) व*
*मानवाधिकार कार्यकर्ता*
जिला – पीलीभीत हजारा क्षेत्र : ट्रांश शारदा क्षेत्र में कई मुख्य मार्गों का कायाकल्प होने के साथ राहगीरों के साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं जिसमें आए दिन लोग गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं इन दुर्घटनाओं में कहीं न कहीं रोड किनारे बंधे पशु और उनका मलबा, रोड के किनारे – किनारे खड़े कृषि यंत्र ,100 किमी/प्रति घंटे की स्पीड से फर्राटे भरते युवा तथा रोड पर लगी सफेद पट्टी पर बैठे बतकही करते लोग दुर्घटनाओं के कारक सिद्ध हो रहे हैं क्योंकि राहगीरों को पास (साइड) लेने के लिए कई जगहों पर सोचना पड़ता है कि किधर साइड लें किधर नहीं इतने में ही दुर्घटना घटित हो जाती है जिस पर नकेल लगाने में शासन – प्रशासन अभी तक असफल रहा है जिसका परिणाम यह है कि क्षेत्र में अनेकों लोगों ने अपनी जान गंवा दी है कईयों लोग अपाहिज की जिंदगी जी रहे हैं।
वहीं छात्र – छात्राओं के अभिभावक बढ़ती दुर्घटनाओं से सशंकित रहते हैं जो लाजिमी है! क्योंकि
उक्त गंभीर मामले को देखते हुए शासन – प्रशासन के जिम्मेदार लोगों के द्वारा न ही कोई ठोस रणनीति अपनाई जा रही है न ही यातायात के नियमों का समुचित पाठ पढ़ाया जा रहा है।
राहगीरों के साथ लगातार हो रही रोड दुर्घटनाओं का जिम्मेदार कौन…. रोड के किनारे बंधे पशु ..! अथवा उनका मलबा (घूरा) ..! अथवा कृषि यंत्र..!अथवा रोड किनारे पर लाइन से बैठे बतकही करते लोग …! या शासन – प्रशासन की चुप्पी …?*
राहगीरों के साथ लगातार हो रही रोड दुर्घटनाओं का जिम्मेदार कौन…. रोड के किनारे बंधे पशु ..! अथवा उनका मलबा (घूरा) ..! अथवा कृषि यंत्र..!अथवा रोड किनारे पर लाइन से बैठे बतकही करते लोग …! या शासन – प्रशासन की चुप्पी …?*


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*ब्यूरो – एस. के मित्रा (बेनकाब भ्रष्टाचार ) व*
*मानवाधिकार कार्यकर्ता*
जिला – पीलीभीत हजारा क्षेत्र : ट्रांश शारदा क्षेत्र में कई मुख्य मार्गों का कायाकल्प होने के साथ राहगीरों के साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं जिसमें आए दिन लोग गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं इन दुर्घटनाओं में कहीं न कहीं रोड किनारे बंधे पशु और उनका मलबा, रोड के किनारे – किनारे खड़े कृषि यंत्र ,100 किमी/प्रति घंटे की स्पीड से फर्राटे भरते युवा तथा रोड पर लगी सफेद पट्टी पर बैठे बतकही करते लोग दुर्घटनाओं के कारक सिद्ध हो रहे हैं क्योंकि राहगीरों को पास (साइड) लेने के लिए कई जगहों पर सोचना पड़ता है कि किधर साइड लें किधर नहीं इतने में ही दुर्घटना घटित हो जाती है जिस पर नकेल लगाने में शासन – प्रशासन अभी तक असफल रहा है जिसका परिणाम यह है कि क्षेत्र में अनेकों लोगों ने अपनी जान गंवा दी है कईयों लोग अपाहिज की जिंदगी जी रहे हैं।
वहीं छात्र – छात्राओं के अभिभावक बढ़ती दुर्घटनाओं से सशंकित रहते हैं जो लाजिमी है! क्योंकि
उक्त गंभीर मामले को देखते हुए शासन – प्रशासन के जिम्मेदार लोगों के द्वारा न ही कोई ठोस रणनीति अपनाई जा रही है न ही यातायात के नियमों का समुचित पाठ पढ़ाया जा रहा है।






